पटना : बिहार की सियासत में शुक्रवार को एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जहां एनडीए में भाजपा के एमएलसी देवेश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से अपना इस्तीफा दे दिया है। देवेश कुमार ने आज विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस इस्तीफे को बिहार सरकार में आरएलएम (RLM) कोटे से मंत्री दीपक प्रकाश के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर बने रहने को लेकर कानूनी संकट खड़ा हो गया था। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो सदन (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य नहीं है, वह अधिकतम 6 महीने तक ही मंत्री पद पर बना रह सकता है। दीपक प्रकाश इस अवधि को पूरा करने के करीब थे और इसको लेकर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी बिहार सरकार से कड़ी टिप्पणी की थी।
सुप्रीम कोर्ट की थी सख्त टिप्पणी
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने बिहार सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था। कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि, "बिना किसी सदन का सदस्य बने 6 महीने से अधिक समय तक कोई व्यक्ति मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है?" कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तारीख तय की थी।
देवेश कुमार मार्च 2021 में राज्यपाल मनोनीत कोटे से एमएलसी बने थे और उनका कार्यकाल मार्च 2027 में पूरा होना था। देवेश कुमार के इस इस्तीफे के बाद अब वह सीट खाली हो गई है। माना जा रहा है कि सरकार अब इस खाली सीट से मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की तैयारी करेगी, जिससे उनकी मंत्री पद की सदस्यता पर मंडरा रहा कानूनी खतरा टल जाएगा और वे संवैधानिक रूप से अपनी जिम्मेदारी निभा सकेंगे।
