बिहार पुलिस को बड़ी सफलता; मुंगेर में 3 इनामी नक्सलियों ने किया सरेंडर
- Edited by: Nilesh Dwivedi
- Updated Dec 28, 2025, 08:48 PM IST
बिहार के मुंगेर में तीन कुख्यात नक्सलियों के आत्मसमर्पण के साथ बिहार पुलिस को बड़ी सफलता मिली। सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से प्रभावित होकर उन्होंने हथियार डालने का फैसला किया। इस कदम को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलते हालात और विकास की बढ़ती गति का अहम संकेत माना जा रहा है।
मुंगेर में 3 कुख्यात नक्सलियों ने किया सरेंडर (प्रतीकात्मक फोटो: Canva)
Bihar Naxal Surrender News: रविवार को बिहार पुलिस को नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली। मुंगेर में तीन वांछित नक्सलियों ने पुलिस महानिदेशक विनय कुमार के सामने हथियार डाल दिए। आत्मसमर्पण करने वालों में तीन-तीन लाख रुपये के इनामी नारायण कोड़ा और बहादुर कोड़ा भी शामिल थे। इन नक्सलियों ने पुलिस के आगे बड़ी मात्रा में हथियार और गोलियां भी जमा कराईं। जानकारी के अनुसार, सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के साथ-साथ सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और लोगों के सहयोग से प्रभावित होकर, मुंगेर के नक्सल प्रभावित खड़गपुर थाना क्षेत्र में स्थित आरएसके कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तीनों नक्सलियों ने औपचारिक रूप से हथियार छोड़ दिए।
आत्मसमर्पण करने वालों में कौन थे शामिल?
कार्यक्रम में बिहार के डीजीपी विनय कुमार के साथ एडीजी मुख्यालय-सह-कानून-व्यवस्था कुंदन कृष्णन, एसटीएफ एसपी संजय सिंह और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी इस मौके पर पहुंचे। आत्मसमर्पण करने वालों में 23 मामलों में वांछित जोनल कमांडर नारायण कोड़ा, 24 मामलों में फरार जोनल कमांडर बहादुर कोड़ा और तीन मामलों में आरोपी दस्ता सदस्य बिनोद कोड़ा शामिल थे।
नक्सलियों के परिवारों को सम्मान
इस कार्यक्रम में पहले आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली रावण कोड़ा और भोला कोड़ा के परिजन भी पहुंचे थे। अधिकारियों ने नक्सलियों के परिवारों को सम्मान देकर उनका हौसला बढ़ाया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने पुलिस को दो इंसास राइफल, चार एसएलआर, लगभग 500 राउंड कारतूस, वॉकी-टॉकी, बम और अन्य सामान सौंप दिया।
कौन-कौन रहा कार्यक्रम में मौजूद?
कार्यक्रम के दौरान डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि माओवाद खत्म करने की दिशा में देश के अलग-अलग राज्यों ने उल्लेखनीय प्रगति की है। कई क्षेत्रों से माओवाद पूरी तरह सिमट चुका है। बिहार में भी इस मोर्चे पर तेजी से काम हुआ है और 23 अति-संवेदनशील इलाकों में अब नक्सलियों की मौजूदगी नहीं के बराबर रह गई है। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं। विकास से जुड़ाव ही इसकी सबसे बड़ी वजह है, जिसके चलते नक्सली प्रभाव लगातार घट रहा है और लोग हिंसा छोड़कर मुख्यधारा और प्रगति की राह अपना रहे हैं।
(इनपुट - आईएएनएस)
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