Begusarai News: करोड़ों रुपये की लागत से बना बिहार का सबसे 'हाईटेक और मॉडल' माना जाने वाला बेगूसराय सदर अस्पताल एक बार फिर विवादों और सुर्खियों में है। यहां पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता की एक ऐसी शर्मनाक तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। कागजी लिखापढ़ी और अधिकार क्षेत्र के झंझट में एक महिला का शव कई घंटों तक बारिश में भीगता रहा और बेबस परिजन एक-एक पर्ची के लिए भटकते रहे।
13 जुलाई के सड़क हादसे से जुड़ा है मामला
जानकारी के अनुसार, बलिया थाना क्षेत्र के बड़ी बलिया, वार्ड नंबर 10 की रहने वाली सुशीला देवी 13 जुलाई को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, पुलिस की सलाह पर परिजन शव का पोस्टमार्टम कराने बुधवार को सदर अस्पताल पहुंचे। लेकिन अस्पताल कर्मियों ने बिना पुलिस रिपोर्ट के शव को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।
15 घंटे तक अस्पताल से थाने के काटते रहे चक्कर
इसके बाद जो नजारा दिखा, उसने इंसानियत को शर्मसार करने वाला था। परिजन पुलिस कागजात बनवाने थाने गए और महिला का शव अस्पताल परिसर में मूसलाधार बारिश में भीगता रहा। बलिया थाना ने परिजनों को नगर थाना भेजा, लेकिन नगर थाना पुलिस ने ऐसी किसी सूचना या कागजात से इनकार कर दिया। सुबह से शाम तक परिजन अस्पताल से बलिया थाना और नगर थाना के चक्कर काटते रहे। आखिरकार, जब परिजनों ने डीएम और उच्च अधिकारियों से शिकायत की चेतावनी दी और हंगामा किया, तब जाकर 15 घंटे बाद पोस्टमार्टम स्लिप जारी हुई।
इस पूरे मामले पर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक (DS) डॉ. अखिलेश कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि इसमें स्वास्थ्य कर्मियों की कोई लापरवाही नहीं है। नियमानुसार पुलिस रिपोर्ट मिलने के बाद ही पोस्टमार्टम होता है। पुलिस के स्तर से एक्सीडेंटल डेथ सर्टिफिकेट देने में देरी हुई। जैसे ही अस्पताल प्रबंधन को रिपोर्ट मिली, तुरंत पोस्टमार्टम करवा दिया गया।
