सांकेतिक फोटो
MP Assembly Monsoon Session: मध्य प्रदेश में 108 एंबुलेंस सेवा और बेरोजगारी से जुड़ी योजनाओं में बड़ी खामियां सामने आई हैं। एंबुलेंस सेवा में भारी खर्च के बावजूद गड़बड़ियां हुई। सरकार की ओर से विधानसभा में बताया गया कि एंबुलेंस संचालन करने वाली कंपनी ने फर्जी दस्तावेजों से काम लिया, जिस पर केस दर्ज किया गया है। वहीं करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद युवा बेरोजगार ही हैं और श्रमिकों के पंजीकरण में भी भारी गिरावट आई है।
राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने विधानसभा में बताया कि जिस कंपनी "मां अंबे" को एंबुलेंस सेवा का ठेका दिया गया था, उसके दस्तावेजों में गंभीर गड़बड़ी पाई गई। इस कारण उसका श्रमिक पंजीयन रद्द कर दिया गया है और कंपनी पर भोपाल की अदालत में केस भी दर्ज हुआ है। मंत्री ने बताया कि पिछले तीन सालों में इस सेवा पर सरकार ने 900 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जबकि एक एंबुलेंस की कीमत करीब 15 लाख रुपये होती है। यानी प्रति एंबुलेंस पर औसतन 45 लाख रुपये खर्च हुए, जो सवाल खड़े करता है।
विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल पर बताया गया कि बेरोजगार युवाओं को "आकांक्षी युवा" कहा गया है। लेकिन 2018 से 2024 के बीच केवल 52,000 युवाओं को ही रोजगार मिला। 2021 में पुणे की एक कंपनी को 25,000 युवाओं को नौकरी दिलाने की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन सिर्फ 4,433 ही योग्य पाए गए। निर्माण श्रमिकों के पंजीकरण में भी बड़ी गिरावट आई है, जिससे 8.40 लाख मजदूर सूची से बाहर हो गए हैं।