भोपाल

Damoh: पूर्व विधायक के पति ने कोर्ट में लगाई अर्जी, कहा- चुनाव जीतकर छोड़ गई पत्नी, अब दे गुजारा भत्ता

राजनीतिक जीवन में अच्छा प्रदर्शन करने वाली बीजेपी की पूर्व विधायक सोना बाई अहिरवार अब अपने पति सेवक राम के आरोपों के घेरे में हैं। सेवक राम ने दावा किया है कि उन्होंने अपनी पत्नी को राजनीतिक ऊंचाई पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन जब वह विधायक बनीं तो बेवफा हो गईं। उन्होंने कोर्ट में गुजारा भत्ता के लिए अर्जी लगाई है।

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पूर्व विधायक के पति ने मांगा गुजारा भत्ता

Photo : Times Now Digital

Damoh News: अबतक आपने ऐसी बातें जरूर सुनी होंगी कि पति के पढ़ाने-लिखाने के बाद पत्नी को नौकरी मिल गई, जिसके बाद उसने पति को छोड़ दिया। पति कोर्ट से गुहार लगाता है और सोशल मीडिया पर दंपति की कहानियां तैरने लगती हैं। अबकी बार ऐसा ही एक मुद्दा राजनीतिक गलियारे से आया है। भाजपा के एक पूर्व विधायक के पति ने कोर्ट में अर्जी लगाई है कि उनकी पत्नी उन्हें गुजर बसर करने के लिए भत्ता दे। उनका कहना है कि पत्नी को विधायक बनाने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की थी।

क्या है पूरा मामला

मामला एमपी के दमोह जिले से सामने आया है। इस जिले के पथरियां से भाजपा की पूर्व विधायक सोना बाई अहिरवार के पति सेवक राम ने जिला कोर्ट के कुटुंब न्यायालय में गुजारा भत्ता दिए जाने की अर्जी लगाई है। सोना बाई 2003 से 2008 तक भाजपा की विधायक रही हैं और इस दौरान वो बेहद सुर्खियों में भी रहीं। SC वर्ग की महिला नेता होने की वजह से आज भी भाजपा की राजनीति में सोना बाई सक्रिय हैं और जिले के साथ प्रदेश में VVIP विजिट और बड़े समारोहों में सोना बाई को भाजपा बराबर तवज्जो देती है लेकिन सेवक राम इन सब सुख-सुविधाओं से अछूते हैं। उन्होंने कोर्ट में अर्जी भर नहीं लगाई बल्कि मीडिया के सामने आकर अपनी पीड़ा भी कही। सेवक राम ने दावा किया है कि उन्होंने अपनी पत्नी को राजनीतिक ऊंचाई पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन जब वह विधायक बनीं तो बेवफा हो गईं और उन्हें जीवन के अंतिम पड़ाव पर आर्थिक तंगी और अकेलेपन का सामना करना पड़ रहा है।

कोर्ट में गुजारा भत्ता की अर्जी

दमोह के कुटुंब न्यायालय में सेवक राम ने याचिका दायर कर हर माह 25 हजार गुजारा भत्ता दिए जाने की मांग की है। उनके वकील नितिन मिश्रा ने बताया कि कोर्ट ने अर्जी स्वीकार कर ली है और अब जल्द ही पूर्व विधायक को नोटिस भेजा जाएगा। अदालत की ओर से सुनवाई के बाद उचित आदेश पारित किया जाएगा।

क्या कहते हैं सेवक राम

सेवक राम ने मीडिया से बातचीत में कहा कि 2003 में टिकट से लेकर जीतने तक सोना बाई की राजनीतिक यात्रा में उनका पूरा योगदान रहा। वे उन्हें दमोह से भोपाल और दिल्ली तक नेताओं से मिलवाने ले गए। इसी मेहनत के फलस्वरूप उन्हें पथरिया से टिकट मिला और विधायक चुनी गईं।

हालांकि, सेवक राम का कहना है कि विधायक बनने के बाद सोना बाई का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। पहले दूरी बनी और फिर 2009 में बिना तलाक दिए ही उन्होंने साथ छोड़ दिया और सागर में अलग मकान बनाकर रहने लगीं।

सेवक राम का कहना है कि वे दिव्यांग हैं और अब मेहनत-मजदूरी करने में असमर्थ हैं। ऐसे में उनके पास कोई स्थायी आय का स्रोत नहीं बचा है। दूसरी ओर सोना बाई के पास पेंशन, संपत्ति और राजनीतिक रसूख है लेकिन वे अपने पति की सुध नहीं ले रहीं हैं।

बयान से बच रहीं पूर्व विधायक

सोना बाई अहिरवार 2003–2008 तक पथरिया सीट से भाजपा विधायक रहीं। उस समय मध्यप्रदेश में उमा भारती के नेतृत्व में सरकार बनी थी और सोना बाई को सत्ता के गलियारों में अच्छी पहुंच मानी जाती थी। आज भी वह भाजपा के आयोजनों और वीवीआईपी कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल होती हैं। मामला अदालत में लंबित है और नोटिस की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस पूरे विवाद के बाद पूर्व विधायक फिलहाल मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं और किसी भी प्रतिक्रिया से परहेज कर रही हैं।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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