भोपाल

'धर्मांतरण माफिया' पर मोहन सरकार का बुलडोजर एक्शन , ध्वस्त हो रहा मछली परिवार का अवैध निर्माण

मध्य प्रदेश की राजधानी में ड्रग तस्करी और कई गैर कानूनी कार्यों के जरिए अपना साम्राज्य स्थापित करने वाले मछली परिवार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो रही है। उसकी बनाई गई आलीशान कोठी पर भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बुलडोजर चलाया जा रहा है।

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मछली परिवार पर मोहन यादव का बुलडोजर एक्शन

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी में ड्रग तस्करी और कई गैर कानूनी कार्यों के जरिए अपना साम्राज्य स्थापित करने वाले मछली परिवार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो रही है। उसकी कोकता क्षेत्र में बनाई गई आलीशान कोठी पर भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बुलडोजर चलाया जा रहा है।

पिछले दिनों राजधानी में ट्रक तस्करी और महाविद्यालय की छात्राओं से रेप तथा उन्हें ब्लैकमेल करने के आरोप में पुलिस ने मछली परिवार के दो सदस्यों, यासीन और शाहवर मछली, को गिरफ्तार किया था। बाद में इसी परिवार के शारिक मछली को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया।

करोड़ों की संपत्ति बनाने का आरोप

पुलिस और जिला प्रशासन की जांच कार्रवाई में इस बात का खुलासा हुआ कि इस परिवार ने कई करोड़ की संपत्ति बना रखी है और अवैध कब्जे भी हैं। यह सारी संपत्ति इस परिवार ने अवैध कार्यों के जरिए बनाई है। मछली परिवार के खिलाफ कई मामलों का खुलासा हुआ है, वहीं पीड़ित लोग भी सामने आए हैं। जिला प्रशासन और पुलिस ने इस परिवार की अवैध संपत्तियों का विवरण तैयार किया और कार्रवाइयों का सिलसिला शुरू किया।

बुलडोजर से गिराया जा रहा है निर्माण

इसी क्रम में गुरुवार को कोकता क्षेत्र में बनी कई करोड़ों रुपए की हवेली को बुलडोजर और जेसीबी मशीनों की मदद से गिराया जा रहा है। यह हवेली लगभग 10 हजार वर्ग फीट में बनी है, वहीं कई एकड़ क्षेत्र में यह फैली हुई है जिसके आगे और पीछे आकर्षक बगीचे भी हैं। कोकता क्षेत्र की हवेली को ढहाए जाने से पहले सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए क्योंकि वहां रहने वाले रहवासी कार्रवाई का विरोध करने भी सामने आ गए थे।

पुलिस की भारी सुरक्षा

लगभग 500 पुलिस जवानों की तैनाती की गई है जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाइश दी। उसके बाद प्रशासन ने हवेली में रखे सामानों को उतार कर ट्रकों में रखा, फिर बुलडोजर और जेसीबी मशीन चलाई जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा इमारत को गिराए जाने की चल रही कार्रवाई के दौरान कई ऐसे लोग भी पहुंचे जो मछली परिवार के पीड़ित थे।

मोहन यादव सरकार की बड़ी कार्रवाई

एक व्यक्ति के हाथ में तो तिरंगा झंडा था और वह लहरा रहा था; उसका आरोप है कि मछली परिवार के सदस्यों ने उसे पूर्व में प्रताड़ित किया था, वसूली की थी, और जेल तक भिजवा दिया था। इसकी शिकायत पर पुलिस कार्रवाई करने तैयार नहीं थी, मगर मुख्यमंत्री मोहन यादव के सख्त रवैए के चलते अब मछली परिवार पर कार्रवाई हो रही है। इससे पहले भी जिला प्रशासन ने मछली परिवार की तीन बड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई की थी। 30 जुलाई को अवैध रूप से बने फार्महाउस, वेयरहाउस, मकान आदि को तोड़ा गया था।

(आईएएनएस इनपुट )

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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