भोपाल

आधार कार्ड से होंगे महाकाल के दर्शन, न लंबी लाइन का झंझट न लंबा इंतजार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 2, 2023, 02:20 PM IST

उज्जैन के स्थानीय निवासियों के लिए महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए अगल व्यवस्था की जाएगी। उन्हें आधार कार्ड दिखाने पर मंदिर में दर्शन मिले सकेंगे। निवासियों को अलग गेट से मंदिर में प्रवेश भी मिलेगा। नई व्यवस्था मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद निवासियों को उपलब्ध कराई जा सकेगी।

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उज्जैन निवासियों के लिए महाकाल के दर्शन के लिए नई व्यवस्था लागू होगी।

Photo : ANI

Mahakaleshwar Temple News: महाकाल के दर्शन का इंतजार करने वाले उनको भक्तों को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। अब भक्तों को महाकाल के दर्शन के लिए लंबी लाइन के झंझट के साथ लंबे इंतजार से भी मुक्ति मिलेगी। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से लिए गए फैसले के अनुसार, स्थानीय निवासियों को आधार कार्ड से महाकाल के दर्शन मिलेंगे। इतना ही नहीं उन्हें एक अलग गेट से मंदिर में प्रवेश मिलेगा।

मंदिर प्रबंध कमेटी ने शिरडी और तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर यह फैसला लिया है। बता दें, प्रबंध समिति के साथ उज्जैन कलेक्टर व अन्य अधिकारियों की एक बैठक हुई, जिसमें स्थानीय भक्तों को इस तरह की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया।

बैठक में रखा गया था प्रस्ताव

इस बैठक में महापौर मुकेश टटवाल ने उज्जैन के स्थानीय निवासियों के लिए अलग से महाकाल के दर्शन का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई, जिसके बाद वहां के निवासियों को परिचय पत्र के लिए अपना आधार कार्ड दिखाना होगा, जिसके बाद उन्हें अगल द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा।

कब से मिलेगी यह सुविधा

बता दें, मंदिर की प्रबंध समिति स्थानीय निवासियों को आधार कार्ड से दर्शन की सुविधा मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उपलब्ध कराएगी। इससे महाकाल के भक्त सुगमता से उनके दर्शन कर सकेंगे। अभी भक्तों को महाकाल के दर्शन के लिए लंबी लाइन और घंटो का इंतजार करना पड़ता है। दर्शन के लिए अलग से रसीद भी काटी जाती है। दरअसल, मंदिर का कॉरिडोर बनने के बाद महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए कई नियमों में बदलाव किया गया है। इस बैठक में मंदिर की कार्ययोजना व प्रस्तावित कार्यों की भी जानकारी दी गई। समिति द्वारा प्रस्तावित बजट का भी अनुमोदन बैठक में किया गया, जिसमें बताया गया 2023-24 में मंदिर की प्रस्तावित आय 22,800 लाख व व्यय 22,700 लाख है।

10 अप्रैल तक गर्भगृह में नहीं मिलेगा प्रवेश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों को तीन अप्रैल से 10 अप्रैल तक गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिलेगा। इस दौरान न तो भक्त महाकाल के गर्भगृह में जाकर दर्शन कर पाएंगे न ही उन्हें जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर उन्हें स्पर्श कर सकेंगे। यह बदलाव पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा को लेकर किया गया है। कहा गया है कि इस आयोजन में काफी भीड़ जुटने का अनुमान है। लाखों की संख्या में भक्त इस कथा में पहुंचेंगे, जिसके चलते गर्भगृह में प्रवेश बंद कर दिया गया है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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