जहरीला कफ सिरप मामला : मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने से 14 बच्चों की मौत से देशभर में हाहाकार मचा हुआ है। दर्जनों बच्चे अब भी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने तुरंत उस कफ सिरप पर बैन लगा दिया, लेकिन जिन परिवारों ने अपने बच्चे खोए हैं, उनके घर में तो दिवाली से पहले अंधेरा हो गया। छिंदवाड़ा की घटना से सबक लेते हुए कई अन्य राज्यों ने भी उस कफ सिरप पर बैन लगा दिया। कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के पते पर जांच टीम भेजी गई और जो खुलासे हुए हैं और गंभीर और चौंकाने वाले हैं।
जिस कोल्ड्रिफ सिरप ने इतने बच्चों की जान ली उसमें डायथिलीन ग्लायकॉल की मात्रा 48.6 फीसद मिली। जिसके बाद तमिलनाडु सरकार ने 3 अक्टूबर 2025 को श्रेसन फार्मा कंपनी में इस कफ सिरप के उत्पादन पर रोक लगा दी थी। इस कंपनी के खिलाफ मध्य प्रदेश में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस की एक विशेष जांच टीम तमिलनाडु भेजी गई थी।
3BHK जितनी जगह में फैक्ट्री
जांट कमेटी को मिली जानकारी में जो खुलासा हुआ है वह चौंकाने वाला और बेहद गंभीर है। टीम जब जानलेवा कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के पते पर पहुंची तो फैक्ट्री के नाम पर एक 3BHK जितनी जगह मिली, जिसमें 60 प्रोडक्ट बन रहे थे। रंगनाथन नाम का एक व्यक्ति इस फैक्टरी को चला रहा था। कंपनी का डायरेक्टर फरार है और तमिलनाडु व मध्य प्रदेश पुलिस रंगनाथन की तलाश में है।
क्वालिटी क्ट्रोल लैब भी नहीं
जांच टीम ने पाया कि फैक्ट्री में किसी तरह की कोई क्वालिटी कंट्रोल लैब मौजूद नहीं थी। यही नहीं माइक्रोबायलॉजी लैब भी वहां नहीं थी। यानी फैक्ट्री में ऐसा कुछ नहीं था, जिससे कफ सिरप में डायथिलीन ग्लायकॉल की मात्रा को नियंत्रित किया जा सके।
2009 में बंद हुई फैक्ट्री!
एक और बात पता लगी जो चौंकाने वाली होने के साथ ही प्रशासन की लापरवाही की तरफ भी इशारा करती है। तमिलनाडु के कांचीपुरम में मौजूद इस फैक्ट्री को साल 2009 में बंद कर दिया गया था। इसके बाद साल 2011 में एक नए नाम श्रीसन फार्मा के नाम से यह फैक्ट्री फिर चालू हो गई। यहीं का मशीनों पर जंग लगा हुआ पाया गया और स्टाफ को भी किसी तरह की ट्रेनिंग नहीं दी गई थी।
