Who Was Rani Kamalapati: भारत का पहला प्राइवेट रेलवे स्टेशन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal) में स्थित है। जिसका नाम रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (Rani Kamalapati Railway Station) है, जो आधुनिक सुविधाओं से लैस है। इस रेलवे स्टेशन का नाम पहले हबीबगंज (Habibganj Railway Station) था। इसके पुनर्विकास (Redevelopment)के बाद स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति कर दिया गया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रानी कमलापति आखिर कौन थीं? जिनके नाम पर इस स्टेशन का नाम बदलकर रखा गया। आइए इस सवाल का जवाब जानते हैं:
भोपाल की अंतिम रानी (The Last Hindu Queen of Bhopal)
रानी कमलापति भोपाल की अंतिम हिंदू रानी थीं। उन्होंने पार्कों और मंदिरों की स्थापना करने के साथ ही जल प्रबंधन के क्षेत्र में भी बहुत काम किया। रानी कमलापति को भोपाल को गोंड राजवंश की अंतिम रानी भी माना जाता है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार इतिहासकार बताते हैं कि भोपाल से करीब 60 किमी दूर गिन्नौर गढ़ (Ginnor Garh) हुआ करता था। जिसके राजा निजाम शाह से रानी कमलापति का विवाह हुआ था। भोपाल भी उस समय निजाम शाह के अधीन आता था। रानी कमलापति उनकी सात पत्नियों में से एक थीं।
रानी कमलापति कब आईं भोपाल
इतिहासकारों के अनुसार निजाम शाह के भतीजे आलम शाह की नजर अपनी चाचा की संपत्ति पर थी। वह उनकी पत्नी कमलापति को भी अपनाना चाहता था। अपने इरादों को अंजाम देने के लिए उसने अपने चाचा की हत्या कर दी। आलम ने निजाम शाह के खाने में जहर मिला दिया था। निजाम के निधन के बाद आलम शाह ने राज्य पर कब्जा कर लिया। जिसके बाद रानी कमलापति अपने बेटे नवल शाह के साथ भोपाल आ गईं और यहां के रानी कमलापति महल (Rani Kamalapati Palace) में रहने लगीं।
रानी कमलापति ने लिया हत्या का बदला
रानी कमलापति अपने पति की हत्या का बदला लेना चाहती थी। जिसके लिए उन्होंने इस्लामपुर में शासन कर रहे अपने दोस्त मोहम्मद खान से मदद मांगी। जिसके बदले में उन्होंने एक लाख अशर्फियां देने को भी कहा। लेकिन आलम शाह की हत्या के बाद वे सिर्फ 50 अशर्फियां ही उन्हें दे पाईं। इन अशर्फियों के साथ ही उन्होंने भोपाल का हिस्सा भी मोम्मद खान को दे दिया। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इतिहासकार शंभू दयाल कहते हैं कि रानी कमलापति के जिंदा रहने तक मोम्मद खान ने कभी भी उनपर हमला नहीं किया। उनकी मौत के बाद ही खान ने भोपाल पर कब्जा किया।
रानी कमलापति (The Queen Behind India First Private Railway Station Name)
रानी कमलापति के नाम पर सिर्फ भोपाल का रेलवे स्टेशन ही नहीं है, बल्कि यहां पर स्थित कमला पार्क भी उनके नाम पर हैं। इस पार्क में ही रानी कमलापति का महल भी स्थित है। कहा जाता है कि राजा निजाम शाह ने 18वीं शताब्दी में इस महल का निर्माण अपनी पत्नी रानी कमलापति के प्रेम में कराया था। इसके अलावा भोपाल में रानी कमलापति की 32 फीट की विशाल प्रतिमा भी स्थित है। जिसका अनावरण फरवरी 2020 में किया गया था।
- भारत का पहला प्राइवेट रेलवे स्टेशन कहां है?
भारत का पहला प्राइवेट रेलवे स्टेशन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित है। जिसका नाम रानी कमलापति रेलवे स्टेशन है।
रानी कमलापति भोपाल की अंतिम हिंदू रानी थीं। उन्हें भोपाल में गोंड आदिवासी समुदाय की अंतिम रानी भी माना जाता है। उनके पिता सीहोर के सल्कनपुर रियासत के राजा कृपाल सिंह सरौतिया थे। वे गिन्नौरगढ़ के राजा निजाम शाह की पत्नी थीं।
रानी कमलापति को वीरांगना के तौर पर उनकी बहादुरी और शौर्य के लिए जाना जाता है। भोपाल के इतिहास और संस्कृति में उनके योगदान को सम्मान देने के लिए स्टेशन नाम बदलकर रानी कमलापति रेलवे स्टेशन रखा गया।
रानी कमलापति रेलवे स्टेशन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। जिसमें यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मिलती हैं। यहां पर वेटिंग लाउंज, डिजिटल डिस्प्ले, फ्री वाई-फाई, यात्रियों के लिए विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं।
रानी कमलापति महल भोपाल के कमला पार्क में स्थित है। जिसे राजा निजाम शाह ने 18वीं सदी में अपनी पत्नी रानी कमलापति के प्रेम में बनवाया था। आज यह भोपाल की ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है।
FAQs
भारत का पहला प्राइवेट रेलवे स्टेशन कहां है?
भारत का पहला प्राइवेट रेलवे स्टेशन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित है। जिसका नाम रानी कमलापति रेलवे स्टेशन है।
