भिवाड़ी अग्निकांड में जिंदा जलने वाले छह मजदूर पूर्वी चंपारण के; परिजन बोले- मालिक मजदूरी नहीं देता था,काम छोड़ने वाले थे
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Feb 16, 2026, 09:36 PM IST
भिवाड़ी फैक्ट्री अग्निकांड में जिंदा जले मजदूरों की पहचान कर ली गई है, जिनमें छह बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रहने वाले थे। घायलों का इलाज जारी है और मामले की जांच चल रही है।
भिवाड़ी में मरने वालों में छह बिहार के।
राजस्थान के खुशखेड़ा-भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र स्थित फैक्ट्री में हुए भीषण हादसे में सात मजदूरों की मौत हो गई। इस हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हादसे में मरने वालों की सिर्फ हड्डियां ही मिलीं। वहीं, इस हादसे में मरने वालों की पहचान हो गई है। इन मृतकों में छह मजदूर बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
भिवाड़ी में मरने वालों की हुई पहचान
उनकी पहचान सुजांत कुमार, मिंटू कुमार, अजीत कुमार, रवि कुमार, श्याम कुमार और अमरेश कुमार के रूप में हुई है। घायलों में चिरैया थाना क्षेत्र के हराज गांव निवासी मनु पासवान, नितेश कुमार, कन्हैया पासवान, आशिक पासवान और दीपलाल कुमार शामिल हैं। हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के गांवों में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों में कोहराम मच गया। बताया गया कि अधिकांश मजदूर अपने परिवार के साथ राजस्थान में रहकर काम कर रहे थे।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से दो-दो लाख रुपये अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।
पूर्वी चंपारण के चार मजदूरों का हुआ सत्यापन
वहीं, पूर्वी चंपारण के डीएम सौरभ जोरवाल ने चार मौतों की पुष्टि की है। उनके अनुसार पांच लोगों की सूची मिली है,लेकिन अब तक चार मृतकों का ही सत्यापन हो सका है। एक घोड़ासहन,एक शिकारगंज और दो हरसिद्धि क्षेत्र के हैं। अन्य मृतकों का सत्यापन जारी है। पांच घायलों की पहचान की पुष्टि हो चुकी है।
इस बीच मृतकों परिजनों ने फैक्ट्री के मालिक पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि फैक्ट्री मालिक समय पर मजदूरी नहीं देता था और मजदूर फैक्ट्री छोड़कर घर लौटने का मन बना चुके थे और वे होली में घर आने वाले थे।

भिवंडी में हादसा।
गारमेंट फैक्ट्री के नाम पर बनाए जा रहे थे पटाखे
इस बीच, खैरथल-तिजारा जिले की अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सुमित्रा पारीक ने बताया कि संबंधित परिसर को गारमेंट फैक्ट्री के नाम पर लीज पर लिया गया था, लेकिन अंदर अवैध रूप से पटाखों का निर्माण किया जा रहा था। आग लगने की सूचना पुलिस को नियमित गश्त के दौरान मिली, जिसके बाद तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।
घटनास्थल से मिले कंकाल
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार हादसे के समय फैक्ट्री में 20 से अधिक लोग मौजूद थे। आग लगते ही कई मजदूर बाहर निकल आए, लेकिन नौ लोग अंदर फंस गए। इनमें से सात की जलकर मौत हो गई। आग पर करीब डेढ़ घंटे बाद काबू पाया जा सका। मौके से बारूद, पटाखे और पैकिंग सामग्री बरामद की गई। कुछ कंकाल भी मिले हैं और बुरी तरह झुलसे शवों के अवशेषों को पॉलीथीन बैग में एकत्र किया गया। दो घायलों को गंभीर हालत में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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