बस्तर में नक्सलवाद पर करारा प्रहार; 2025 में 256 नक्सली मारे गए, 1500 ने छोड़ा हिंसा का रास्ता
- Edited by: Nishant Tiwari
- Updated Jan 4, 2026, 09:54 AM IST
छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में साल 2025 बड़ा साबित हुआ है। खुफिया जानकारी पर आधारित अभियानों के तहत सुरक्षा बलों ने 256 नक्सलियों को मुठभेड़ों में ढेर किया, जबकि 1,500 से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। बेहतर सुरक्षा हालात के चलते बस्तर में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की रफ्तार भी तेज हुई है।
बस्तर में 2025 में नक्सलियों की टूटी कमर (सांकेतिक तस्वीर | PTI)
Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के बस्तर रेंज में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में वर्ष 2025 एक निर्णायक मोड़ के रूप में सामने आया है। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) पी. सुंदरराज ने बताया कि साल 2025 के दौरान सुरक्षा बलों ने विभिन्न मुठभेड़ों में 256 नक्सलियों को मार गिराया, जबकि 1,500 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
IG सुंदरराज ने दी जानकारी
IG सुंदरराज ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि खुफिया जानकारी पर आधारित सटीक ऑपरेशन, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और लगातार क्षेत्रीय वर्चस्व (एरिया डोमिनेशन) के चलते बस्तर संभाग में माओवादी नेटवर्क को गंभीर रूप से कमजोर किया गया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का पुनर्वास सरकार की नीति के तहत किया जा रहा है, ताकि उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
बीजापुर और सुकमा में मुठभेड़, 14 माओवादियों के शव बरामद
आईजी सुंदरराज का यह बयान उस समय आया है, जब सुरक्षा बलों ने बीजापुर और सुकमा जिलों में हुई अलग-अलग मुठभेड़ों के बाद 14 माओवादियों के शव बरामद किए। उन्होंने बताया कि दक्षिणी इलाकों में माओवादियों की गतिविधियों को लेकर मिले पुख्ता इनपुट के आधार पर यह ऑपरेशन शुरू किया गया था। ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच कई बार मुठभेड़ हुई। तलाशी अभियान के बाद बीजापुर जिले से दो और सुकमा जिले से 12 माओवादियों के शव बरामद किए गए। मुठभेड़ स्थलों से एके-47 और इंसास राइफल समेत भारी मात्रा में हथियार भी जब्त किए गए हैं।
सुरक्षा के साथ विकास को मिली रफ्तार
एक आधिकारिक बयान में वर्ष 2025 को बस्तर रेंज के लिए ऐतिहासिक बताया गया है। बयान के अनुसार, माओवादी नेतृत्व के खिलाफ बड़ी सफलताओं, हथियारों की बड़े पैमाने पर बरामदगी और वरिष्ठ कैडरों के आत्मसमर्पण से क्षेत्र में स्थायी शांति की मजबूत नींव पड़ी है। बेहतर सुरक्षा स्थिति का असर विकास और जनकल्याण पर भी नजर आ रहा है। प्रशासन के मुताबिक, सड़कों, संचार नेटवर्क, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं के विस्तार में तेजी आई है, जिससे दूरदराज और पहले दुर्गम इलाकों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित हो रही है।
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