शहर

बाबा सिद्दीकी हत्या केस : अनमोल बिश्नोई की कस्टडी को लेकर परिवार ने कोर्ट में दायर की अर्जी, क्या है दलील

बाबा सिद्दीकी के परिवार ने आरोप लगाया है कि US से डिपोर्टेशन के बाद अनमोल बिश्नोई के इंडिया में मौजूद होने के बावजूद, मुंबई पुलिस ने उसकी कस्टडी लेने की अब तक कोई कोशिश नहीं की है। अर्जी के मुताबिक, अनमोल बिश्नोई मुख्य वॉन्टेड आरोपी है और बाबा सिद्दीकी की हत्या के पीछे की बड़ी साज़िश का पता लगाने के लिए उससे पूछताछ ज़रूरी है।

Image

बाबा सिद्दीकी हत्या केस में आरोपी अनमोल बिश्नोई की कस्टडी पर परिवार का सवाल

मुंबई में NCP नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। पीड़ित परिवार ने स्पेशल MCOCA कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मुंबई क्राइम ब्रांच को वॉन्टेड आरोपी अनमोल बिश्नोई की कस्टडी लेने के निर्देश देने की मांग की है। यह अर्जी बाबा सिद्दीकी की बेटी शहज़ीन सिद्दीकी की ओर से दायर की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि अमेरिका से डिपोर्टेशन के बाद भारत में मौजूद होने के बावजूद अनमोल बिश्नोई की कस्टडी लेने के लिए मुंबई पुलिस ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

परिवार का कहना है कि अनमोल बिश्नोई इस मामले का मुख्य वॉन्टेड आरोपी है और उससे पूछताछ किए बिना हत्या की कथित साजिश की पूरी परतें सामने नहीं आ सकतीं। अर्जी में यह भी दावा किया गया है कि परिवार को पहले जानकारी मिली थी कि वह US कस्टडी में था और यह जानकारी जांच अधिकारी के साथ साझा भी की गई थी।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि जब परिवार ने RTI के तहत अनमोल बिश्नोई को भारत लाने की कार्रवाई से जुड़ी जानकारी मांगी, तो पुलिस ने इसे गोपनीयता का हवाला देते हुए देने से इनकार कर दिया। इसके खिलाफ अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष भी अपील दायर की गई, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली।

कस्टडी एप्लीकेशन दाखिल करने में देरी क्यों

परिवार ने यह भी कहा है कि अनमोल बिश्नोई के भारत में डिपोर्ट होने और NIA द्वारा कस्टडी में लिए जाने के बावजूद मुंबई पुलिस ने इस केस में उसकी कस्टडी मांगने की प्रक्रिया नहीं की। सवाल उठाया गया है कि आखिर ट्रायल कोर्ट में कस्टडी एप्लीकेशन दाखिल करने में देरी क्यों हुई।

अर्जी में जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि जांच अधिकारी गवाह जीशान सिद्दीकी द्वारा बताए गए कुछ लोगों से पूछताछ करने में असफल रहे, जिससे जांच अधूरी रह गई। परिवार ने यह भी आशंका जताई है कि जांच एजेंसी पर “बाहरी दबाव” हो सकता है, हालांकि यह दावा कोर्ट में लगाया गया है और इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

आवेदक ने यह भी बताया है कि मामले से जुड़ी एक अलग रिट याचिका पहले से ही बॉम्बे हाई कोर्ट में लंबित है। परिवार ने स्पेशल MCOCA कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह अभियोजन पक्ष को तुरंत अनमोल बिश्नोई की कस्टडी लेने का निर्देश दे और देरी के कारणों पर जवाब मांगे। यह मामला अब स्पेशल MCOCA कोर्ट में विचाराधीन है।

atul. Singh
अतुल सिंहauthor

मैं अतुल सिंह,मैं 14 वर्षों से अधिक समय से टीवी पत्रकारिता में विभिन्न क्षेत्रों को खबरों को कवर करने वाला अनुभवी पत्रकार हूं। वर्तमान में Times Now नवभारत के लिए principal correspondent हूं। मैंने इंडिया टीवी, ज़ी न्यूज़,IBN 7 (न्यूज़ 18),Lemon न्यूज़ जैसे प्रमुख मीडिया संगठनों के साथ भी काम किया है। मनोरंजन,नागरिक मुद्दे ,इंफ्रा,राजनीति,आम और विधानसभा चुनाव और अपराध जैसे विषयों को बखूबी कवर किया है। वर्तमान में मुम्बई ब्यूरो से जुड़ा हुआ हूं। कई राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े कई विशेष खबरें भी कवर किया है।

और पढ़ें
End of Article