उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हज कमेटी की जमीन की बिक्री में कथित अनियमितताओं के मामले में समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री आजम खान समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामला करीब 60 हजार वर्गफुट हज कमेटी की जमीन की बिक्री से जुड़ा है। सतर्कता विभाग की जांच में जमीन की बिक्री में नियमों को दरकिनार कर एक निजी कंपनी को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं।
इस मामले में हज कमेटी के पूर्व चेयरमैन आजम खान और दो पूर्व सचिव सतर्कता विभाग के निशाने पर हैं। इसके अलावा एमिश डेवलपर्स के मालिक और दो अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। आजम खान के साथ ही हज कमेटी के तत्कालीन सचिव लईक अहमद, डॉक्टर एमएए खान, अमीश डेवलपर्स के मालिक मोहम्मद अयूब और मुस्तकीम अहमद पर भी FIR दर्ज हुई है।
प्राइवेट कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप
सतर्कता विभाग की जांच के मुताबिक, हज कमेटी की जमीन की बिक्री के दौरान निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का कथित तौर पर पालन नहीं किया गया। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर निजी फर्म को फायदा पहुंचाया गया। जांच में सामने आया कि इस पूरी प्रक्रिया के चलते हज कमेटी को करीब 2 करोड़ 8 लाख 95 हजार रुपये का राजस्व नुकसान हुआ।
किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला?
एफआईआर उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान के लखनऊ सेक्टर थाने में दर्ज हुई है. एफआईआर नंबर 0018 है और यह 8 सितंबर को दोपहर करीब पौने तीन बजे दर्ज की गई। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120-बी के साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 12, 13(1)(बी) और 13(2) लगाई गई हैं। यानी धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप इस केस में शामिल हैं।
धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की धाराओं में केस
मामले में आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद सतर्कता विभाग ने जांच तेज कर दी है। अब जांच एजेंसी जमीन की बिक्री से जुड़े दस्तावेजों, फैसलों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
सतर्कता विभाग यह भी जांच कर रहा है कि जमीन की बिक्री की प्रक्रिया में किस स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ और इससे निजी फर्म को कथित तौर पर कैसे लाभ मिला। मामले में आगे जांच के आधार पर अन्य तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
