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Ram Mandir Donation: राम मंदिर की कितनी हुई कमाई? 2 महीने में विदेशों से आया झोली भरकर चंदा; जानिए पूरी डिटेल्स

Ram Mandir Donation: अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट को लगातार देश विदेश से चंदा मिल रहा है। जानकारी के मुताबिक, महाकुंभ के 45 दिनों में 3 करोड़ श्रद्धालुओं ने भगवान राम लला के दर्शन किए थे। जनवरी और फरवरी महीने में कुल 26.89 करोड़ का दान मिला।

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अयोध्या राम मंदिर

Ram Mandir Donation: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा इकट्ठा करने का अभियान यानी धन संचय अभियान अभी तक जारी है। 14 जनवरी 2021 से लेकर अभी तक देश दुनिया से राम भक्त श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट क्षेत्र को चंदा भेज रहे हैं। यह चंदा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खाते में जाता है, जिसे मंदिर के विभिन्न विकास कार्यो में लगाने की बात कही जा रही है। अगर, पिछले 2 महीने की बात करें रामलाल को 26.89 करोड़ का दान मिला है, जिसमें 57 लाख का विदेशी भक्तों से मिला दान शामिल है।

महाकुंभ के 45 दिनों में आया इतना चंदा

जानकारी के मुताबिक, महाकुंभ के 45 दिनों में 3 करोड़ श्रद्धालुओं ने भगवान राम लला के दर्शन किए थे। जनवरी और फरवरी महीने में कुल 26.89 करोड़ का दान मिला। साल 2023-24 में राम मंदिर ट्रस्ट को 376 करोड़ की आय हुई थी, जबकि साल 2025 के दो महीने यानी जनवरी और फरवरी में ही ट्रस्ट को 26.89 करोड़ की आय हुई है। जनवरी में 11.56 करोड़ और फरवरी में 15.13 करोड़ का दान रामलाल मंदिर को मिला है।

इन देशों से आया चंदा

महाकुंभ के दौरान अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल, मलेशिया और कनाडा से विदेशी दान भी मिला। अप्रैल 2023 से फरवरी 2025 तक रामलाल को 10.43 करोड़ का विदेशी दान मिल चुका है। मंदिर का निर्माण कार्य अभी भी जारी है। अभी गर्भगृह के कुछ हिस्सों में मूर्तियां स्थापित की जानी शेष हैं। अभी बाहरी हिस्से का भी कार्य कर मंदिर को और खूबसूरत बनाने की कोशिश है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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