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बद्रीनाथ के पास टूटा बर्फ का पहाड़, कंचन गंगा में एवलांच से हड़कंप; क्यों खिसका ग्लेशियर?

चमोली जिले के बद्रीनाथ के पास कुबेर भंडार चोटी से हिमस्खलन हुआ, जिससे कंचन गंगा के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में हिमस्खलन हुआ।

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कंचन गंगा में एवलांच

चमोली : जिले में स्थित बदरीनाथ धाम के पास रविवार सुबह अचानक हिमस्खलन (एवलांच) की घटना सामने आई। अधिकारियों के अनुसार, कुबेर भंडार शिखर से बर्फ का बड़ा हिस्सा खिसककर कंचन गंगा के ऊपरी कैचमेंट क्षेत्र में आ गिरा। यह स्थान बदरीनाथ मंदिर से करीब दो किलोमीटर आगे बताया जा रहा है। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी तरह की जनहानि या संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचा।

बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर नहीं पहुंच असर

प्रशासन ने बताया कि हिमस्खलन का असर बदरीनाथ नेशनल हाईवे तक नहीं पहुंचा। बर्फ का बड़ा हिस्सा घाटी क्षेत्र में ही रुक गया, जिससे सड़क यातायात और स्थानीय जनजीवन पूरी तरह सामान्य बना हुआ है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बर्फ से ढकी ऊंची चोटियों वाले इलाकों में इस तरह की घटनाएं प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं और समय-समय पर होती रहती हैं।

क्या बोले डीएम

चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा कि लोगों को सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन लगातार पूरे क्षेत्र पर नजर बनाए हुए है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। जिलाधिकारी ने लोगों से केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की।

आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर

घटना के बाद प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर हैं। हालांकि फिलहाल किसी खतरे की स्थिति नहीं बताई गई है। बदरीनाथ यात्रा भी सामान्य रूप से जारी है और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा है।

ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान परिवर्तन

हिमालयी क्षेत्रों में मौसम में लगातार बदलाव और बर्फबारी के चलते इस तरह की घटनाएं अक्सर देखने को मिलती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान परिवर्तन और बर्फ के दबाव के कारण हिमस्खलन की घटनाएं बढ़ जाती हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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