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अशोकनगर में सट्टा किंग पर बड़ी स्ट्राइक, प्रशासन का बुलडोजर तैयार, फार्म हाउस के बाद होटल की बारी

एमपी के अशोकनगर के सट्टा किंग कहे जाने वाले आजाद खान पर प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की। प्रशासन द्वारा फार्म हाउस पर बुलडोजर चलाने के बाद अगला निशाना होटल आजाद पैलेस को बनाया जा रहा है।

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अशोकनगर में सट्टा किंग पर बड़ी स्ट्राइक

मध्य प्रदेश के अशोकनगर के चर्चित ऑनलाइन सट्टा सरगना और आत्महत्या के दुष्प्रेरण (Abetment) के आरोपी आजाद खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रशासन ने अवैध साम्राज्य के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 20 दिसंबर को कोलुआ रोड स्थित आजाद खान के आलीशान दो मंजिला फार्म हाउस और बाउंड्री वॉल को जमींदोज कर दिया था। इसके बाद अब प्रशासन का अगला निशाना उसका मशहूर 'होटल आजाद पैलेस' है। प्रशासन ने आय से अधिक संपत्ति के मामले के साथ बिना अनुमति के अवैध निर्माणों की लंबी सूची भी तैयार की है, जिससे शहर के इस सट्टा किंग के आर्थिक साम्राज्य की नीव हिल गई है।

प्रशासन के निशाने पर होटल आजाद पैलेस

नगर पालिका की जांच में खुलासा हुआ है कि होटल आजाद पैलेस का निर्माण नियमों को ताक पर रखकर किया गया है। निकाय की टीम ने निरीक्षण में पाया कि होटल के लिए न तो जरूरी अनुमतियां ली गई हैं और न ही मार्जिन ओपन स्पेस (MOS) का पालन किया गया है। इतना ही नहीं, होटल में अवैध रूप से बेसमेंट का निर्माण किया गया है, जो नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 187 (8) का उल्लंघन है। नगर पालिका CMO विनोद उन्नीतान के निर्देश पर टीम ने रविवार को होटल पहुंचकर उसे खाली करने के आदेश दिए। कार्रवाई के डर से होटल मालिक खुद ही फर्नीचर, सोफे और छत पर लगे टावर को हटाने में जुट गए हैं।

पार्किंग और फायर एनओसी का अभाव

होटल के दस्तावेजों की जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है कि भवन निर्माण की अनुमतियां आजाद खान के साथ उसके भाई पार्षद राशिद खान और शाहिद खान के नाम पर भी हैं। बताया जा रहा है कि है होटल में न तो पार्किंग की व्यवस्था है और न ही किसी प्रकार की अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) के पुख्ता इंतजाम। सक्षम कार्यालय (Competent Office) से फायर NOC उपलब्ध न कराना शासन के निर्देशों की गंभीर अवहेलना है।

Makarand Kale
मकरंद कालेauthor

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।\nततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि\n\nसाल 2008 में by chance journalist बना। 2013 से by choice journalist हूं। कहते हैं ना कि अच्छे काम में पहले बहुत परेशानियां आती हैं। और बाद में उसी की आदत पड़ जाती है।

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