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Antilia Explosives Case: सचिन वाझे की जमानत पर Bombay HC का ब्रेक, NIA की अपील पर कोर्ट सख्त; 7 अक्टूबर को अगली सुनवाई

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने दलील दी कि विशेष अदालत ने अनावश्यक टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह सवाल तक किया कि क्या एनआईए उद्योगपति मुकेश अंबानी के परिवार के बयान दर्ज करने के लिए किसी ’’मुहूर्त’’ का इंतजार कर रहा था और यह टिप्पणी भी की कि कथित आतंकवादी खतरे के बावजूद परिवार अपनी जिंदगी का आनंद ले रहा था।

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एंटीलिया विस्फोटक मामले में सचिन वाझे को राहत नहीं

मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2021 में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास एक गाड़ी से विस्फोटक सामग्री बरामद होने के मामले में बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को जमानत देने के आदेश पर बुधवार को अंतरिम रोक लगायी। एनआईए ने दावा किया कि विशेष अदालत द्वारा वाझे को राहत देना 'पूरी तरह गलत' था, क्योंकि उनका उद्देश्य आतंक फैलाना था और उन पर हत्या का आरोप भी था। इसके बाद उच्च न्यायालय ने जमानत पर अंतरिम रोक लगायी।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने दलील दी कि विशेष अदालत ने अनावश्यक टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह सवाल तक किया कि क्या एनआईए उद्योगपति मुकेश अंबानी के परिवार के बयान दर्ज करने के लिए किसी ’’मुहूर्त’’ का इंतजार कर रहा था और यह टिप्पणी भी की कि कथित आतंकवादी खतरे के बावजूद परिवार अपनी जिंदगी का आनंद ले रहा था।

वाझे फिलहाल ठाणे केंद्रीय कारागार में हैं और मंगलवार को विशेष अदालत के आदेश के बाद उनकी जमानत से जुड़ी औपचारिकताएं अभी पूरी नहीं हुई थीं। न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण की ओर से दायर अपील पर सात अक्टूबर को सुनवाई तय की और वाझे को नोटिस भी जारी किया।

पीटीआई भाषा के हवाले से अदालत ने कहा कि हम विशेष अदालत द्वारा 29 सितंबर को पारित आदेश पर अंतरिम रोक लगा रहे हैं। राज्य के अधिकारी हमारे आदेश की जानकारी तत्काल संबंधित जेल अधिकारियों को दें। उच्च न्यायालय ने एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह की संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया। सिंह ने कहा कि विशेष अदालत ने वाझे को जमानत देते समय गलती की थी।

वाझे को अभी जेल से रिहा नहीं किया गया है, क्योंकि रिहाई से जुड़ी औपचारिकताएं अभी पूरी नहीं हुई हैं। मुंबई में 25 फरवरी 2021 को उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास ’एंटीलिया’ के पास एक एसयूवी में विस्फोटकों में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री मिली थी। इस एसयूवी को चोरी किया गया था और इसके मालिक, व्यवसायी मनसुख हिरेन पांच मार्च 2021 को पड़ोसी ठाणे में मृत पाए गए थे।

भ्रष्टाचार मामले में भी आरोपी थे सचिन वाझे

सचिन वाझे को एनआईए ने 13 मार्च, 2021 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांचे जा रहे भ्रष्टाचार मामले में आरोपी बनाया गया। वाझे को भ्रष्टाचार मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है।इससे पहले आज न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति आशीष चव्हाण की पीठ ने याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था जिसके बाद एनआईए ने दूसरी पीठ के समक्ष अपील पेश की। न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सिंह ने कहा कि वाझे पर गंभीर अपराधों के आरोप हैं और उन्हें जमानत देने के मामले में विशेष अदालत ’’पूरी तरह गलत’’ थी।

सिंह ने कहा, ’’वाझे ने समाज में आतंक पैदा करने के इरादे से एक उद्योगपति के आवास के पास विस्फोटकों से भरी कार खड़ी की थी। उन पर एक व्यक्ति की हत्या करने का भी आरोप है। उन्होंने विशेष अदालत के आदेश में की गई उन टिप्पणियों पर भी सवाल उठाया, जिसमें अंबानी परिवार के किसी भी सदस्य के बयान दर्ज नहीं करने के लिए एनआईए की आलोचना की गई थी।

सिंह ने कहा, ’’एनआईए ने अंबानी परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले तीन लोगों के बयान दर्ज किए हैं। विशेष अदालत ने अनावश्यक टिप्पणियां करते हुए यह सवाल किया कि क्या एनआईए अंबानी परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज करने के लिए किसी ’मुहूर्त’ का इंतजार कर रहा था। अदालत ने यह भी कहा कि कथित आतंकवादी खतरे के बावजूद अंबानी परिवार अपनी जिंदगी का आनंद ले रहा था। दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि वह विशेष अदालत के आदेश पर अंतरिम रोक लगा रहा है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल की दलीलें सुनने और चुनौती दिए गए आदेश का अवलोकन करने के बाद हम अंतरिम रोक लगाने के पक्ष में हैं। आदेश की जानकारी तत्काल जेल अधिकारियों को दी जाए। मंगलवार को विशेष एनआईए अदालत द्वारा वाझे को जमानत दिए जाने के तुरंत बाद एजेंसी ने उच्च न्यायालय का रुख किया था और न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अपील का उल्लेख किया था। हालांकि, उस पीठ ने भी खुद को सुनवाई से अलग कर लिया, जिसके बाद बुधवार को अपील को न्यायमूर्ति डांगरे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष रखा गया।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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