उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 24 अप्रैल यानी शुक्रवार को 'जोनल कान्फ्रेन्स-2026' आयोजित की जाएगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन किसान-केंद्रित, कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण आयोजन होगा। इस सम्मेलन में उत्तर भारत के राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों, एफपीओ, स्टार्टअप्स, केवीके, वित्तीय संस्थानों और खरीद एजेंसियां शामिल होंगी। इसके माध्यम से खेती, किसान आय, तकनीक, मार्केटिंग और कृषि इंफ्रास्टक्चर से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। सम्मेलन की तैयारियों को लेकर कृषि मंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर दिशा- निर्देश दिए।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र को आधुनिक, समावेशी और किसानों के अनुकूल बनाने के लिए 24 अप्रैल को लखनऊ में उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन देशभर में चल रही जोनल कॉन्फ्रेंस चेन का एक अहम हिस्सा है। इसके बाद दक्षिण, उत्तर-पूर्व, पूर्व और अंत में राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
कौन से राज्य होंगे शामिल
इस सम्मेलन में दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत उत्तर क्षेत्र के कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इससे यह साफ है कि केंद्र सरकार कृषि विकास को सभी राज्यों की साझी भागीदारी और समाधान के साथ आगे बढ़ाना चाहती है। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे।
इस सम्मेलन की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ औपचारिक समीक्षा नहीं होगी, बल्कि कृषि से जुड़ी योजनाओं और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसमें कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि ढांचा फंड, बागवानी की संभावनाएं, आत्मनिर्भर भारत के तहत दलहन मिशन, खाद्य तेल और तिलहन मिशन, डिजिटल खेती, किसान रजिस्ट्रेशन, खाद की उपलब्धता, उसका संतुलित उपयोग और कालाबाजारी रोकने जैसे अहम मुद्दों पर बात होगी।
पीआई के हवाले से यह सम्मेलन आगामी राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन की तैयारी को भी मजबूत आधार देगा। जोनल कॉन्फ्रेंस की यह श्रृंखला जयपुर, लखनऊ, विशाखापट्टनम, गुवाहाटी और भुवनेश्वर के बाद दिल्ली में 28-29 मई को राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन तक पहुंचेगी, जिससे क्षेत्रीय अनुभवों को राष्ट्रीय कृषि रणनीति में रूपांतरित करने में मदद मिलेगी।
