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Mathura Flood Video: यमराज के दरबार पर यमुना! मथुरा में बाढ़ का कहर; विश्राम घाट की सीढ़ियां डूबीं

मथुरा स्थित विश्राम घाट तक यमुना का पानी पहुंच चुका है। प्रशासन लोगों से घाटों से दूर रहने की अपील कर रहा है। यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़कर खतरे के निशान के नजदीक पहुंच चुका है।

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मथुरा में बाढ़

मथुरा : यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ने से मथुरा के डूब क्षेत्रों में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। पिछले दो दिनों से पानी भरने के कारण आस-पास के इलाकों में रहने वाले लोग आशंकित हैं। यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़कर खतरे के निशान के नजदीक पहुंच चुका है। हरियाणा में हथिनीकुण्ड बैराज ओखला बैराज से पानी छोड़े जाने का असर मथुरा में दिखने लगा है। यहां विश्राम घाट (जहाँ श्रीकृष्ण ने कंस वध के बाद विश्राम किया था), पूरा जलमग्न है। यमराज घाट की सीढियां पूरी तरह से ढूब गई हैं। आरती स्थल पर यमुना का पानी 2-3 फ़ीट तक है पहुंच चुका है।

जानकारी के मुताबिक, जलस्तर खतरे के निशान के पास 165.20 मीटर से 79 सेंटीमीटर पर पहुंच गया है। फिलहाल बाढ़ जैसे हालातों को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट है। लोगों को भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है।

मौसम विभाग का बारिश का अलर्ट

पुलिस लगातार लोगों को यमुना के घाटों से दूर रहने की अपील कर रही है। फिर भी कुछ लोग किनारों पर पहुंच रहे है, जिन्हें हटाया जा रहा है। पिछले 24 घंटे से लगातार पानी का स्तर बढ़ रहा है। उधर, मौसम विभाग (आईएमडी) ने चेतावनी दी है कि एनसीआर में अगले पूरे हफ्ते तक बारिश और तेज हवाओं का असर रहेगा। विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 22 अगस्त को आंधी और बारिश के साथ गरज-चमक की आशंका रहेगी। 23 से 25 अगस्त तक आसमान में बादल छाए रहेंगे और मध्यम दर्जे की बारिश होगी। 26 और 27 अगस्त को गरज-चमक के साथ बारिश या फिर तेज बौछारें पड़ सकती हैं।

मौसम विभाग ने फिलहाल कोई चेतावनी जारी नहीं की है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और यमुना का अभी भी ऊंचा जलस्तर लोगों की चिंताओं को बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो किसानों की फसलों का और भी ज्यादा नुकसान हो सकता है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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