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आगरा पुलिस का 'ऑपरेशन कोडब्रेक', खौफ में साइबर ठग; अब तक इतने लाख की रिकवरी

आगरा पुलिस ने साइबर अपराधियों पर नियंत्रण पाने के लिए 'ऑपरेशन कोडब्रेक' की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत पुलिस ने साइबर अपराधियों की पहचान कर उन्हें पकड़ने की कार्रवाई भी शुरू कर दी है।

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(सांकेतिक फोटो-Istock)

Photo : iStock

आगरा में बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ आगरा पुलिस ने 'ऑपरेशन कोडब्रेक' नामक एक नया अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ऑप्टींग फ्रॉड, यूजर्स धोखाधड़ी, फिशिंग और फेक सोशल मीडिया अकाउंट्स जैसे डिजिटल अपराधों में शामिल गिरोहों की पहचान करना और उन्हें कानून के दायरे में लाना है। पुलिस ने इस ऑपरेशन के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है और कई साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। इस अभियान में 'प्रतिबिंब पोर्टल' का उपयोग किया जा रहा है, जो केंद्र सरकार द्वारा विकसित किया गया है। यह पोर्टल आईडी ट्रैकिंग, डिजिटल फुटप्रिंट विश्लेषण और अकाउंट लिंकिंग जैसे एडवांस टूल्स प्रदान करता है, जिससे अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी संभव हो रही है।

अपराध से निपटने के लिए ट्रेनिंग

पुलिस कर्मियों को साइबर अपराधों से निपटने के लिए ट्रेनिंग भी दी जा रही है। डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि ऑनलाइन साइबर जनसुनवाई केंद्र के माध्यम से नागरिक सीधे अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। पुलिस टीमों को टेक्निकल एक्सपर्ट्स और डेटा एनालिस्ट्स का सहयोग मिल रहा है, जिससे एफआईआर दर्ज कर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। साइबर क्राइम टास्क फोर्स को तैनात किया गया है और कई उच्च-प्रोफाइल साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी की गई है।

सैकड़ों फेक सोशल मीडिया प्रोफाइल्स को बंद किया गया है और लाखों की रिकवरी कर पीड़ितों को राहत पहुंचाई गई है। आगरा पुलिस का मानना है कि इस ऑपरेशन के जरिए साइबर अपराधों पर नियंत्रण पाया जा रहा है और भविष्य में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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