आगरा

122 साल का हुआ UP का ये रेलवे स्टेशन, 1929 में आए थे महात्मा गांधी; जानें क्या है नाम?

आगरा सिटी रेलवे स्टेशन ने अपनी 122वीं सालगिरह पर भव्य "स्टेशन महोत्सव" का आयोजन किया।1903 में ब्रिटिश अधिकारी स्ट्रेची द्वारा स्थापित इस ऐतिहासिक स्टेशन का कायाकल्प किया गया है, जो न केवल इसकी विरासत को संजोता है, बल्कि आगरा की सांस्कृतिक धरोहर को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।

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आगरा सिटी स्टेशन (फाइल फोटो)

आगरा : आगरा सिटी रेलवे स्टेशन ने अपनी 122वीं सालगिरह पर गौरवशाली इतिहास को फिर से सबके सामने लाने का काम किया है। आगरा रेल मंडल ने इस पुराने स्टेशन को धरोहर के रूप में सजाने-संवारने की पहल की है। स्टेशन की मरम्मत कर इसे नया, सुंदर रूप दिया गया है, जबकि इसकी ऐतिहासिक पहचान को बरकरार रखा गया है। इस खास मौके पर "स्टेशन महोत्सव" का आयोजन किया गया, जिसमें आगरा के सांसद एस.पी. सिंह बघेल मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह स्टेशन सिर्फ सफर की शुरुआत या अंत का स्थान नहीं है, बल्कि आज़ादी की लड़ाई का गवाह भी है।

आगरा फोर्ट सबसे पुराना स्टेशन

स्टेशन की नींव 1903 में ब्रिटिश अधिकारी स्ट्रेची ने रखी थी। 1929 में महात्मा गांधी भी यहां आए थे और जनसभाएं की थीं। रेल मंडल की इस कोशिश से स्थानीय लोग गर्व महसूस कर रहे हैं और यह आने वाली पीढ़ियों को अपने अतीत से जोड़ने का एक शानदार जरिया बनेगा। आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन, जो 1874 में स्थापित हुआ, सबसे पुराना स्टेशन है। यह स्टेशन 2025 तक लगभग 151 साल पुराना होगा।

आगरा सिटी रेलवे स्टेशन ने अपनी 122वीं सालगिरह पर अपने गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित किया है। आगरा रेल मंडल ने इसे धरोहर के रूप में सजाने की पहल की है, जिसमें स्टेशन की मरम्मत कर इसे नया रूप दिया गया है, जबकि इसकी ऐतिहासिक पहचान को बरकरार रखा गया है। इस अवसर पर "स्टेशन महोत्सव" का आयोजन किया गया, जिसमें सांसद एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि यह स्टेशन आज़ादी की लड़ाई का गवाह है। स्टेशन की नींव 1903 में रखी गई थी और महात्मा गांधी ने 1929 में यहां जनसभाएं की थीं। यह पहल स्थानीय लोगों को गर्व महसूस कराती है और आने वाली पीढ़ियों को अपने अतीत से जोड़ने का एक जरिया बनेगी। आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन, 1874 में स्थापित, सबसे पुराना स्टेशन है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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