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अग्निवीर को ट्रेनिंग के दौरान आया हॉर्ट अटैक, मौत के बाद गांव में पसरा मातम

यूपी में शामली के कैराना क्षेत्र के ऊंचागांव निवासी (नितिन प्रजापति) अग्निवीर को ट्रेनिंग के दौरान अचानक हार्ट अटैक आया और उसकी मौत हो गई। सोमवार सुबह ट्रेनिंग के दौरान दौड़ लगाते समय अचानक वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। साथी जवानों ने उन्हें उठाया, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं।

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सुबह ट्रेनिंग के दौरान नितिन प्रजापति को अचानक हार्ट अटैक और मौत हो गई।

नई दिल्ली: यूपी में शामली के कैराना क्षेत्र के ऊंचागांव निवासी 25 वर्षीय अग्निवीर नितिन प्रजापति की ट्रेनिंग के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। चार महीने पहले सेना में भर्ती हुए नितिन प्रजापति मध्य प्रदेश के जनपद सागर में ट्रेनिंग ले रहे थे। सोमवार सुबह ट्रेनिंग के दौरान दौड़ लगाते समय अचानक वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। साथी जवानों ने उन्हें उठाया, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। नितिन की मौत की खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, गांव में कोहराम मच गया।

नितिन प्रजापति का शव सम्मान के साथ गांव में लाया गया। नितिन प्रजापति, ऊंचागांव निवासी सतीश प्रजापति के बड़े बेटे थे। उनके पिता किराए पर ट्रैक्टर चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। नितिन अविवाहित थे और परिवार में एक छोटा भाई शिवम है जो 12वीं में पढ़ाई करता है। नितिन की एक छोटी बहन भी है। नितिन का सपना था कि सेना में भर्ती होकर देश सेवा करे और परिवार का नाम रोशन करे। किसी ने सोचा भी नहीं था कि ट्रेनिंग के दौरान हार्ट अटैक से उसकी जिंदगी अचानक थम जाएगी।

अधिकारियों से मिली मौत की खबर

नितिन के चचेरे भाई अंकित प्रजापति ने बताया कि सोमवार सुबह आर्मी के अधिकारियों का फोन आया था, जिसमें जानकारी दी गई कि नितिन की ट्रेनिंग के दौरान मौत हो गई है। खबर सुनते ही परिजन बेसुध हो गए और गांव में मातम छा गया। नितिन का पार्थिव शरीर बुधवार को दोपहर आर्मी के जवानों द्वारा ऊंचा गांव पहुंचाया गया। शव गांव पहुंचते ही "हिंदुस्तान जिंदाबाद" और "भारत माता की जय" के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा।

घर में पसरा मातम

नितिन की मां प्रीति नेत्रहीन हैं। लेकिन बेटे की शहादत पर उनका हौसला देखने लायक था। गांव की महिलाओं ने बताया कि मां रोई नहीं बल्कि सभी को ढांढस बंधाती रहीं। मां का कहना था कि मेरा बेटा शहीद हुआ है और मैं भी उसके बिना जी नहीं पाऊंगी। वहीं, नितिन की दादी करेशनी ने नम आंखों से कहा कि बेटे को बहुत मेहनत कर पढ़ाया और आगे बढ़ाया था, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।

पूरा गांव गमगीन

नितिन प्रजापति की असमय मौत से न केवल परिवार बल्कि पूरा क्षेत्र गमगीन है। हर कोई उनके जज्बे को सलाम कर रहा है और परिवार के दुख में शामिल हो रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि नितिन हमेशा मुस्कुराकर सभी से मिलते थे और देश सेवा की बात करते थे।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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