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Badaun में जहर देकर मारे गए 6 बंदर? 2 समुदायों के बीच तनाव; पुलिस तैनात

उत्तर प्रदेश के बदायूं में 6 बंदर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए हैं। संदेह है कि उन्हें जहर देकर मारा गया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में दावा किया गया है कि एक स्थानीय ग्रामीण ने समुदाय में तनाव भड़काने के लिए बंदरों को जहर खिलाया।

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(सांकेतिक फोटो)

बदायूं : जिले में छह बंदर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए और पुलिस ने उन्हें जहर दिए जाने का संदेह जताया है। एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना शुक्रवार को उसहैत थाना क्षेत्र के नगला शिंभू इलाके में हुई जिसके बाद पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) अमित किशोर श्रीवास्तव ने बताया कि 6 बंदरों की मौत की सूचना मिलने पर हमने जांच के लिए दो टीम बनाई हैं। स्थानीय निवासियों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार संदेह है कि गांव के ही किसी व्यक्ति ने बंदरों को जहर दिया है। हम फिलहाल उस व्यक्ति की पहचान करने में जुटे हैं।

दो समुदायों में तनाव भड़काने का आरोप

सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में दावा किया गया है कि एक स्थानीय ग्रामीण ने समुदाय में तनाव भड़काने के लिए बंदरों को जहर खिलाया। श्रीवास्तव ने कहा कि गांव में स्थिति शांतिपूर्ण है। मृत मिले बंदरों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की कि अभी तक कोई औपचारिक शिकायत (तहरीर) दर्ज नहीं की गई है।

पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और औपचारिक शिकायत के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जो भी बेजुबानों के साथ इस तरह का कृत्य किया है, उनके खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई कर जेल भेजा जाएगा। फिलहाल, बंदरों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और ग्रामीणों के सहयोग से उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया है।" पुलिस ने बताया कि मामले में अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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