Aditya Vision Success Story : बड़े औद्योगिक घराने बिहार की पहचान नहीं रहे हैं। यहां तक कि आज भी बिहार औद्योगीकरण की दौड़ में पीछे है। ऐसे में बिहार में बड़े कॉर्पोरेट की कल्पना तो और भी मुश्किल है। लेकिन, बिहार के एक लाल ने बिहार की धरती पर रहकर, वहीं के बाजार की बदौलत एक बड़ा कॉर्पोरेट साम्राज्य खड़ा कर लोहे के चने चबाने जैसा काम किया है। बिहार जैसे कठिन सामाजिक और आर्थिक माहौल में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स रिटेल चेन आदित्य विजन (Aditya Vision Ltd) ने जो कर दिखाया है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। बिना किसी खुद के उत्पादन (No Private Labels) के, सिर्फ दूसरों का सामान बेचकर यह कंपनी आज करीब ₹8,500 करोड़ की मार्केट कैप वाली दिग्गज बन चुकी है। ई-कॉमर्स और ऑनलाइन डिस्काउंट के इस कड़े दौर में भी कंपनी साल-दर-साल करीब 18% की बिक्री बढ़ोतरी दर्ज कर रही है।
| पैरामीटर | विवरण |
| वर्तमान मार्केट कैप (Market Cap) | करीब ₹8,500 करोड़ |
| सालाना बिक्री (Annual Sales) | करीब ₹2,700 करोड़ |
| नेट प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) | 8.5% (सालाना ₹200+ करोड़ की शुद्ध कमाई) |
| सालाना रेवेन्यू ग्रोथ (SSSG) | 15% से 18% के बीच |
| कुल स्टोर्स नेटवर्क (Store Count) | 161 शोरूम (9MFY25 तक) -> FY26 के अंत तक 200+ का लक्ष्य |
| मार्केट शेयर (Bihar Market Share) | 50% से अधिक हिस्सेदारी अकेले बिहार में |
| कंपनी के संस्थापक (Founder) | यशोवर्धन सिन्हा (पूर्व बैंकर, PNB) |
बिहार में कॉर्पोरेट खड़ा करना क्यों मुश्किल?
बिहार की जनसंख्या करीब 14 करोड़ है, जिसके कारण यहां घरेलू सामानों (Consumer Goods) की खपत और बिक्री की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन, इसके बावजूद यहां एक स्थाई कॉर्पोरेट नेटवर्क बनाना बेहद जटिल है, जिसके पीछे कई गहरे कारण हैं। सबसे बड़ी वजह फंडिंग का अभाव और 'बिल्डर' मानसिकता का हावी होना है। बिहार में किसी बड़े विजन या औद्योगिक सपने के लिए स्थानीय स्तर पर धन जुटाना लगभग असंभव है। यहां के राजनेता, अफसर और इंजीनियर अपनी कमाई किसी बिजनेस विजन में लगाने के बजाय बिल्डरों को देना पसंद करते हैं, क्योंकि रियल एस्टेट में महज 6 महीने में पैसा वापस आने का बेसिक फॉर्मूला काम करता है। बिहार में उद्योंगों को लेकर बैंकों का रवैया भी लचर है। वहां, अगर कोई उद्यमी एक बड़ा और स्थाई विजन लेकर स्थानीय बाजार में उतरता है, तो बैंकर्स भी आसानी से लोन नहीं देते। इसके बाद सामाजिक और राजनीतिक खींचतान भी बड़ी बाधा है। 1990 के दशक के बाद बिहार में बाहरी निवेशकों का आना बंद हो गया। यहां का स्थानीय व्यापार सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बुरी तरह बंटा हुआ है। लेकिन, आदित्य विजन ने इन तमाम बाधाओं को पार किया और आज शान से बिहार का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट हाउस है।
Aditya Vision yashovardhan Sinha
एक बैंकर की सूझबूझ : बेली रोड के 1 स्टोर से लेकर स्टॉक मार्केट तक
आदित्य विजन की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे इसके चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर यशोवर्धन सिन्हा का विजन है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में एक सफल बैंकिंग करियर को छोड़कर सिन्हा ने 2008 में पूरी तरह से अपने रिटेल बिजनेस पर फोकस किया, जिसकी शुरुआत उन्होंने 1999 में पटना के बेली रोड पर एक सिंगल स्टोर से की थी। उनकी अगुवाई में यह कंपनी न सिर्फ एक मल्टी-स्टेट रिटेल दिग्गज बनी, बल्कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्ट होने वाली भारत की पहली कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर भी बनी। कंपनी इसी ग्रुप के तहत 'नाइन टू नाइन' (9 To 9) नाम से एक प्रीमियम किराना दुकान श्रृंखला भी चलाती है।
बिजनेस मॉडल और दमदार स्टोर इकोनॉमिक्स
कंपनी मोबाइल, लैपटॉप से लेकर टीवी, एसी और रेफ्रिजरेटर जैसे 10,000 से अधिक प्रोडक्ट्स बेचती है।
डायरेक्ट सोर्सिंग मॉडल: कंपनी किसी प्राइवेट लेबल के बजाय सीधे सैमसंग, एलजी, एप्पल, सोनी और एचपी जैसे 100 से अधिक बड़े ब्रांड्स (OEMs) से 85% इन्वेंट्री सीधे खरीदती है। बाकी 15% डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए आता है। इससे बिचौलियों का मार्जिन बचता है।
लोकल स्टोर का गणित: एक नया स्टोर खोलने में ₹55-65 लाख का कैपेक्स (Capex) लगता है। महज 6 से 8 महीने में स्टोर ब्रेक-ईवन (No Profit No Loss) पर आ जाता है और 3 साल के भीतर पूरा पैसा वसूल (Payback) हो जाता है। प्रत्येक स्टोर से प्रति स्क्वायर फीट ₹45,000 से अधिक का रेवेन्यू आता है।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स का भरोसा: कंपनी की साख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसने दुनिया के सबसे बड़े फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) में से एक, 'कैपिटल ग्रुप' से ₹282 करोड़ की फंडिंग सफलतापूर्वक जुटाई है।
'क्रीपिंग क्लस्टर अप्रोच': अब पूरे हिंदी हार्टलैंड पर नजर
बिहार के सभी 38 जिलों में 108 स्टोर्स के साथ अपना दबदबा बनाने के बाद, आदित्य विजन ने झारखंड के 21 जिलों में 28 स्टोर्स और उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में 25 स्टोर्स खोलकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। कंपनी अब पूर्वी यूपी से आगे बढ़ते हुए सेंट्रल यूपी (मध्य उत्तर प्रदेश) की ओर कदम बढ़ा रही है। 'क्रीपिंग क्लस्टर अप्रोच' (धीमे-धीमे पड़ोसी क्षेत्रों में विस्तार) के जरिए कंपनी अगले 3 से 5 सालों में 20-25% की रेवेन्यू CAGR ग्रोथ के साथ पूरे हिंदी हार्टलैंड में छा जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
शेयर का दमदार प्रदर्शन
आदित्य विजन के शेयर ने पिछले 1 साल में 60 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है। वहीं, पिछले पांच दिन में भी यह 5 फीसदी भाग चुका है। 8.32 हजार करोड़ मार्केट कैप की कंपनी का PE फिलहाल 70 के आसपास है, जो इसके पीयर्स की तुलना में इसे काफी आकर्षक बनाता है।
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