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Year Ender 2025: भारतीय स्टार्टअप के लिए शानदार रहा यह साल, निवेशकों ने जमकर लगाया पैसा!

Year Ender 2025 भारतीय स्टार्टअप्स के लिए 2025 नकदी का वर्ष बन कर उभरा। इस वर्ष को सार्वजनिक बाजारों के जरिए निकासी में जोरदार वृद्धि के लिए याद रखा जाएगा। 2025 में फंडिंग में कमी आई लेकिन 2024 की तुलना में औसत मध्यम सौदों के आकार में दोगुना वृद्धि दर्ज की गई।

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भारतीय स्टार्टअप्स के लिए नकदी का वर्ष बन कर उभरा 2025 (फोटो क्रेडिट- iStock)

Year Ender 2025 : भारतीय स्टार्टअप के लिए यह वर्ष समाप्त होने के साथ नकदी का वर्ष बन कर उभरा है। जहां एक ओर सार्वजनिक निर्गम गतिविधियों में तेजी दर्ज की गई तो वहीं डील की गुणवत्ता में भी सुधार दर्ज किया गया। वर्ष 2023 को फंडिंग विंटर यानी पूंजी जुटाने के लिए एक कठिन दौर के रूप में जाना गया और 2024 को सतर्क आशावाद के रूप में परिभाषित किया गया। इसी तरह, 2025 को सार्वजनिक बाजारों के जरिए निकासी में जोरदार वृद्धि के लिए याद किया जाएगा।

इस वर्ष फंडिंग में कमी आई लेकिन औसत मध्यम सौदों का आकार 2024 की तुलना में लगभग दोगुना होकर 14 लाख अमेरिकी डॉलर हो गया, जो कि निवेशकों की बढ़ती मैच्योरिटी को दर्शाता है।

टेक्नोलॉजी स्टार्टअप ने 10.5 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए

स्टार्टअप और प्राइवेट कंपनियों को लेकर विस्तृत जानकारी और विश्लेषण प्रदान करने वाले ट्रैक्सन के अनुसार, देश के टेक्नोलॉजी स्टार्टअप ने इस वर्ष 2025 में 10.5 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए, जो कि इससे पिछले वर्ष 2024 में जुटाए गए 12.7 अरब अमेरिकी डॉलर से 17 प्रतिशत और 2023 के 11 अरब अमेरिकी डॉलर से चार प्रतिशत से कम है।

इस वर्ष 10 करोड़ अमेरिका डॉलर या इससे अधिक की फंडिंग के लिए आयोजित दौर की संख्या भी 2024 की तुलना में 19 से घटकर मात्र 14 रह गईं। हालांकि, बड़ी डील में एक अरब अमेरिकी डॉलर के साथ ई मोबिलिटी, 45 करोड़ अमेरिकी डॉलर के साथ जेप्टो, 27.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर के साथ ग्रीनलाइन का नाम शामिल रहा।

कम फंडिंग के बावजूद बढ़े नकदी सृजन के मामले

इस वर्ष कम फंडिंग के बावजूद नकदी सृजन के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, इसका नेतृत्व स्टार्टअप के आईपीओ में फिर से आई तेजी ने किया। भारतीय शेयर बाजार में लेंसकार्ट, ग्रो, मीशो और फिजिक्सवाला सहित कुल 18 स्टार्टअप लिस्ट हुए, जिन्होंने मिलकर 41,000 करोड़ रुपए जुटाए, जबकि 2024 में कुल 29,000 करोड़ रुपए जुटाए गए थे।

2025 रहा नकदी का वर्ष

न्यूज एजेंसी पीटीआई- भाषा के अनुसार, ट्रैक्सन की सह-संस्थापक नेहा सिंह ने कहा, "2025 को मैं नकदी का वर्ष कहूंगी। यह आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) का वर्ष रहा। यह ऐसा वर्ष रहा जिसमें उद्यम पूंजी (वीसी) और निजी इक्विटी (पीई) समर्थित कंपनियां रिकॉर्ड संख्या में बाजार में पहुंचीं। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड वर्ष रहा। मिसाल के तौर पर, अगर आप पीक एक्सवी और एलीवेशन जैसे कोष देखें तो उनके खंड में कई आईपीओ देखने को मिलेंगे।" सिंह ने आगे के लिए उम्मीद जताते हुए कहा कि 2025 की तुलना में 2026 में फंडिंग अधिक रहने की उम्मीद है।

भारतीय स्टार्टअप्स ने की शानदार घरेलू वृद्धि

ईवाई इंडिया में बाजार एवं दूरसंचार प्रमुख प्रशांत सिंघल ने कहा, "भारत के स्टार्टअप ने शानदार घरेलू वृद्धि की है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग से मान्यता प्राप्त करीब दो लाख स्टार्टअप में से 44,000 केवल इस वर्ष जुड़े हैं। वहीं 11 नए यूनिकॉर्न और 18 सार्वजनिक निर्गम के जरिये 41,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने के साथ भारत अब अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप परिवेश बन गया है।"

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) निवेश और विकास का एक प्रमुख विषय बना रहेगा जबकि डी2सी ब्रांड तथा सेवाओं सहित व्यापक उपभोक्ता बाजार एक ऐसा सर्वोपरि विषय है, जिसे लेकर निवेशक 2026 के लिए बेहद उत्साहित बने हुए हैं।

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शिवानी कोटनाला
शिवानी कोटनाला author

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने ... और देखें

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