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Explained: 6 साल बाद खुलेगी भारत-चीन सीमा, 1 अगस्त से नाथू ला और लिपुलेख दर्रे पर फिर दौड़ेगा कारोबार

India-China Border Trade: करीब 6 साल बाद भारत-चीन सीमा व्यापार 1 अगस्त से नाथू ला और लिपुलेख दर्रों के जरिए फिर शुरू हो रहा है। जानिए इससे कैसे सीमावर्ती व्यापार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और जनजातीय समुदायों को बड़ा लाभ मिलेगा।

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भारत-चीन बॉर्डर ट्रेड की वापसी, सीमावर्ती कारोबार में आएगी नई रफ्तार (तस्वीर-AI)
Authored by: Ramanuj Singh
Updated Jul 29, 2026, 12:30 IST
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India-China Border Trade : भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। करीब 6 साल तक बंद रहने के बाद 1 अगस्त 2026 से सिक्किम के नाथू ला दर्रे और उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के जरिए सीमित स्तर पर व्यापार फिर शुरू होगा। कोविड-19 महामारी के दौरान वर्ष 2020 में यह व्यापार पूरी तरह बंद कर दिया गया था। अब इसके दोबारा शुरू होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले व्यापारियों, स्थानीय लोगों और जनजातीय समुदायों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। यह फैसला केवल व्यापारिक गतिविधियों को ही नहीं बढ़ाएगा, बल्कि भारत और चीन के बीच पुराने व्यापारिक संबंधों को भी नई मजबूती देगा।

क्या है भारत-चीन सीमा व्यापार?

भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार एक विशेष व्यवस्था के तहत होता है। इसमें दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों के रजिस्टर्ड व्यापारी तय नियमों के अनुसार कुछ निश्चित वस्तुओं का आयात-निर्यात करते हैं। यह सामान्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार से अलग होता है और केवल अधिकृत व्यापारियों को ही इसकी अनुमति दी जाती है। इस व्यापार का सबसे बड़ा फायदा सीमावर्ती गांवों और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को मिलता है, जिनकी आजीविका काफी हद तक इसी पर निर्भर रहती है। व्यापार शुरू होने से परिवहन, होटल, गोदाम, मजदूरी और अन्य स्थानीय सेवाओं में भी रोजगार बढ़ता है।

नाथू ला दर्रे से फिर शुरू होगा कारोबार

सिक्किम में स्थित नाथू ला दर्रा भारत और चीन के बीच सबसे महत्वपूर्ण सीमा व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। राज्य के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 1 अगस्त को इस मार्ग से व्यापार दोबारा शुरू होगा। इस मौके पर नाथू ला में एक औपचारिक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें भारत और चीन दोनों देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। अधिकारियों का कहना है कि व्यापार शुरू होने से सिक्किम की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। स्थानीय व्यापारियों को फिर से कारोबार का अवसर मिलेगा और वर्षों से बंद पड़े व्यापारिक नेटवर्क दोबारा सक्रिय हो सकेंगे।

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कोविड महामारी के कारण बंद हो गया था व्यापार

नाथू ला मार्ग से हर साल आमतौर पर मई से नवंबर के बीच व्यापार होता था। लेकिन कोविड-19 महामारी फैलने के बाद वर्ष 2020 में इस मार्ग को बंद कर दिया गया था। महामारी खत्म होने के बाद भी विभिन्न प्रशासनिक और सुरक्षा कारणों से व्यापार दोबारा शुरू नहीं हो पाया। करीब 6 साल बाद अब इस मार्ग के खुलने से सीमावर्ती व्यापारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होती दिखाई दे रही है।

पुराने रेशम मार्ग का है ऐतिहासिक महत्व

नाथू ला केवल एक व्यापारिक मार्ग नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह प्राचीन रेशम मार्ग (Silk Route) का हिस्सा रहा है। इस रास्ते से सदियों तक भारत, तिब्बत और चीन के बीच व्यापार होता था। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह मार्ग पूरी तरह बंद कर दिया गया था। करीब 44 वर्षों तक बंद रहने के बाद इसे 6 जुलाई 2006 को फिर से खोला गया था। इसके बाद कई वर्षों तक यहां नियमित सीमा व्यापार चलता रहा, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण यह फिर बंद हो गया था।

लिपुलेख दर्रे से भी फिर शुरू होगा व्यापार

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख दर्रा भी भारत-चीन सीमा व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यहां से भी 1 अगस्त से व्यापार दोबारा शुरू होगा। हालांकि शुरुआती चरण में व्यापार सीमित रहेगा। चीनी प्रशासन ने पहले चरण में केवल 20 भारतीय व्यापारियों को तिब्बत के पुरांग (तकलाकोट) जाने की अनुमति दी है। अधिकारियों के अनुसार, वहां रहने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण अभी सीमित संख्या में ही व्यापारियों को प्रवेश दिया जा रहा है।

पहले दल के व्यापारी सामान नहीं ले जाएंगे

पहले चरण में जाने वाले व्यापारी अपने साथ कोई नया व्यापारिक सामान नहीं ले जाएंगे। उनका मुख्य उद्देश्य तकलाकोट पहुंचकर वहां की व्यापारिक व्यवस्थाओं का निरीक्षण करना और अपने पुराने सामान की स्थिति देखना होगा। धारचूला के उपजिलाधिकारी एवं व्यापार अधिकारी के अनुसार, सीमा व्यापार संगठन से पहले दल के लिए 20 व्यापारियों के नाम मांगे गए हैं। इसके बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

2019 में छूटे सामान को पहले देखेंगे व्यापारी

सीमा व्यापार संघ ने फैसला किया है कि पहले दल में उन्हीं 20 व्यापारियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनका सामान वर्ष 2019 में तकलाकोट के गोदामों में रह गया था। कोविड महामारी के कारण जब व्यापार अचानक बंद हुआ था, तब कई भारतीय व्यापारियों का माल चीन के गोदामों में ही रह गया था। अब वे पहले उसी सामान की स्थिति का पता लगाना चाहते हैं। इसके बाद ही नया माल भेजने पर निर्णय लिया जाएगा। व्यापारियों का कहना है कि कई वर्षों से उनका सामान वहीं पड़ा है और पहले यह जानना जरूरी है कि वह सुरक्षित है या नहीं।

1962 के युद्ध के बाद बंद हुआ था व्यापार

लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार का लंबा इतिहास रहा है। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह व्यापार पूरी तरह बंद हो गया था। करीब 30 साल बाद, वर्ष 1992 में दोनों देशों ने इसे फिर से शुरू किया। तब से सीमित दायरे में व्यापार चलता रहा और सीमावर्ती लोगों की आय का एक बड़ा स्रोत बन गया।

जनजातीय समुदायों की आजीविका से जुड़ा है यह व्यापार

लिपुलेख मार्ग से होने वाला व्यापार मुख्य रूप से पिथौरागढ़ जिले की व्यांस, दारमा और चौंदास घाटियों में रहने वाले सीमांत जनजातीय समुदायों द्वारा किया जाता है। इन समुदायों का पश्चिमी तिब्बत के साथ सदियों पुराना व्यापारिक संबंध रहा है। वे ऊन, जड़ी-बूटियां, कृषि उत्पाद और अन्य पारंपरिक वस्तुओं का व्यापार करते थे। 1962 में व्यापार बंद होने के बाद इन समुदायों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ था। अब व्यापार दोबारा शुरू होने से इन परिवारों की आय बढ़ने और स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई जान आने की उम्मीद है।

पहले जून में शुरू होना था व्यापार

इस वर्ष सीमा व्यापार को 1 जून से शुरू करने की योजना बनाई गई थी। लेकिन तिब्बती प्रशासन ने पुरांग व्यापारिक मंडी में आवास, दुकानें और अन्य बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह तैयार नहीं होने की बात कही थी। इसी कारण व्यापार शुरू करने की तारीख आगे बढ़ा दी गई। अब जरूरी व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद 1 अगस्त से व्यापार दोबारा शुरू करने का फैसला लिया गया है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा फायदा

एक्सपट्स का मानना है कि सीमा व्यापार शुरू होने से केवल व्यापारियों को ही नहीं, बल्कि पूरे सीमावर्ती क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा। परिवहन, होटल, गोदाम, छोटे दुकानदार, मजदूर और स्थानीय सेवा क्षेत्र से जुड़े हजारों लोगों को रोजगार और आमदनी के नए अवसर मिलेंगे। इसके अलावा, सीमावर्ती इलाकों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से पलायन कम करने और स्थानीय विकास को गति देने में भी मदद मिल सकती है।

भारत-चीन संबंधों के लिए भी सकारात्मक संकेत

हाल के वर्षों में भारत और चीन के संबंध कई मुद्दों को लेकर चुनौतीपूर्ण रहे हैं। ऐसे समय में सीमा व्यापार का फिर से शुरू होना दोनों देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि यह व्यापार अभी सीमित दायरे में शुरू होगा, लेकिन अगर व्यवस्थाएं सुचारु रहीं तो आने वाले समय में व्यापारियों की संख्या और कारोबार दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है।

क्या है आगे की उम्मीद?

फिलहाल दोनों सीमा मार्गों से व्यापार चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है। शुरुआती दौर में व्यवस्थाओं का परीक्षण होगा और उसके बाद जरूरत के अनुसार व्यापार का दायरा बढ़ाया जाएगा। अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो नाथू ला और लिपुलेख दोनों मार्ग एक बार फिर भारत और चीन के बीच पारंपरिक सीमा व्यापार के प्रमुख केंद्र बन सकते हैं। इससे सीमावर्ती राज्यों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, स्थानीय लोगों की आय बढ़ेगी और वर्षों से ठप पड़े व्यापारिक संबंधों में नई ऊर्जा आएगी।

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