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WPI Inflation March 2026: तीन साल के शीर्ष पर पहुंची थोक महंगाई, फ्यूल और पावर ने बिगाड़ा बजट

भारत में थोक महंगा (WPI Inflation ) तीन साल के शीर्ष पर पहुंच गया है। फ्यूल और पावर सेगमेंट में बढ़ी महंगाई की वजह से ओवरऑल महंगाई पर असर देखने आया है। इससे पहले खुदरा महंगाई में उछाल आया है।

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थोक महंगाई में बड़ा इजाफा

WPI Inflation March 2026: भारत में थोक महंगाई ने मार्च 2026 में तेज रफ्तार पकड़ ली है। WPI 3.88% पर पहुंचकर 3 साल के उच्च स्तर पर है। फ्यूल, मैन्युफैक्चरिंग और प्राइमरी आर्टिकल्स की कीमतों में उछाल इसके पीछे मुख्य वजह है, जबकि फूड महंगाई स्थिर बनी हुई है। मार्च 2026 में Wholesale Price Index (WPI) आधारित महंगाई 3.88% रही, जो फरवरी के 2.13% से तेज बढ़ोतरी दिखाती है। यह आंकड़ा बाजार के 3% अनुमान से भी ऊपर रहा। जनवरी 2023 के बाद यह सबसे ऊंचा स्तर है, जो बताता है कि प्रोडक्शन कॉस्ट में दबाव फिर से बढ़ रहा है। हालांकि, यह अब भी RBI की 4 फीसदी की लिमिट में बना हुआ है। इससे पहले CPI में भी बड़ा उछाल आया है।

WPI Inflation Graph

थोक महंगाई में बड़ा उछाल

फ्यूल और पावर से आया बड़ा उछाल

फ्यूल और पावर सेगमेंट में तेज रिकवरी देखने को मिली। फरवरी में जहां यह -3.78% पर था, वहीं मार्च में 1.05% पर पहुंच गया। पेट्रोल (2.50%) और हाई स्पीड डीजल (3.26%) की कीमतों में सुधार ने इस सेगमेंट को ऊपर खींचा। यह संकेत देता है कि ग्लोबल ऑयल ट्रेंड्स का असर अब घरेलू थोक महंगाई पर दिखने लगा है।

मैन्युफैक्चरिंग महंगाई ने बढ़ाया दबाव

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में महंगाई 3.39% तक पहुंच गई, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे तेज है। टेक्सटाइल (4.91%), लेदर (3.03%) और केमिकल्स (2.19%) में लागत बढ़ने से इंडस्ट्रियल प्राइस प्रेशर बढ़ा है। इसका सीधा असर आगे चलकर रिटेल महंगाई और कॉरपोरेट मार्जिन पर पड़ सकता है।

प्राइमरी आर्टिकल्स में तेज उछाल

प्राइमरी आर्टिकल्स में महंगाई 6.36% रही, जो पहले 3.27% थी। नॉन-फूड आर्टिकल्स में 11.50% की तेज बढ़ोतरी ने इस सेगमेंट को ऊपर धकेला। हालांकि फूड इंडेक्स 1.85% पर स्थिर रहा, जिससे उपभोक्ता स्तर पर अभी बड़ा झटका नहीं दिखा।

मासिक आधार पर भी तेजी

मार्च में WPI महीने-दर-महीने 1.64% बढ़ा, जो फरवरी के 0.38% से काफी ज्यादा है। यह दिखाता है कि महंगाई का दबाव सिर्फ सालाना नहीं, बल्कि शॉर्ट टर्म में भी तेजी से बन रहा है।थोक महंगाई में यह तेजी बताती है कि आने वाले महीनों में रिटेल महंगाई (CPI) पर भी दबाव बन सकता है। अगर फ्यूल और मैन्युफैक्चरिंग लागत इसी तरह बढ़ती रही, तो RBI के लिए पॉलिसी रुख संतुलित रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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