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आज से 43 साल पहले लगा था दुनिया का पहला ATM, जानें भारत में कब और किस बैंक में लगा था

World's first ATM : एटीएम आने के बाद कई चीजें आसान होती गई। लोगों को बैंक से पैसे निकालने के लिए घंटों लाइन से छुटकारा मिल गया था। बहुत कम लोगों को पता होगा कि भारत में जन्मे ब्रिटिश मूल के शेफर्ड बैरन ने एटीएम की खोज की थी। एक बार वह बैंक से पैसे निकालने के लिए गए तो उन्हें घंटों लाइन में बिताने पड़े थे। इसके बाद उन्हें चॉकलेट की वेंडिंग मशीन को देखकर ख्याल आया कि जब मशीन चॉकलेट दे सकती है तो पैसे क्यों नहीं।

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एटीएम।

Photo : iStock

ATM Discovery HIstory: पहले के समय में लोगों को बैंक से पैसे निकालने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता था, लेकिन एटीएम आने के बाद से चीजें आसान होती गई। आज के दौर में जरूरत के समय कभी भी केवल कार्ड का उपयोग करके आसानी से एटीएम (ऑटोमेटेड टेलर मशीन) से कैश निकाल सकते हैं। आइए जानते हैं दुनिया में एटीएम की शुरुआत कैसे हुई।

ATM का अविष्कार किसने किया था?

भारत में जन्मे ब्रिटिश मूल के शेफर्ड बैरन को एटीएम की खोज का श्रेय दिया जाता है। एक बार वह बैंक से पैसे निकालने के लिए गए तो उन्हें घंटों लाइन में बिताने पड़े थे। इसके बाद उन्हें चॉकलेट की वेंडिंग मशीन को देखकर ख्याल आया कि जब मशीन चॉकलेट दे सकती है तो पैसे क्यों नहीं।

एटीएम की शुरुआत आज से ठीक 43 साल पहले हुई थी

इसके बाद बैरन खोज में लग गए और एटीएम का आविष्कार किया। एटीएम की शुरुआत आज से ठीक 43 साल पहले हुई थी। 2 सितंबर 1969 को अमेरिका में दुनिया का पहला कार्ड बेस्ड एटीएम लगाया गया था। यह एटीएम न्यूयॉर्क के रॉकविले सेंटर के केमिकल बैंक में खोला गया था।

जानकारी के मुताबिक, बैंक की ओर से दुनिया का पहला एटीएम लगाए जाने का प्रचार करते हुए कहा गया था, "2 सितंबर को हमारा बैंक खुलेगा और फिर कभी बंद नहीं होगा।" इसके बाद एटीएम मशीन धीरे-धीरे पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गई।

भारत में पहला एटीएम कब लगाया गया था?

भारत में पहला एटीएम वर्ष 1987 में एचएसबीसी बैंक द्वारा लगाया गया था। एटीएम के सुविधाजनक होने के कारण देश में इसका नेटवर्क तेजी से बढ़ा और अगले दस वर्षों में देश में एटीएम की संख्या बढ़कर 1,500 तक पहुंच गई। आज के समय में देश में 2.5 लाख से ज्यादा एटीएम हैं। एटीएम आज के समय में पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो चुका है और बड़े स्तर पर उपयोग किया जा रहा है। इसे दुनियाभर में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। यूके में इसे 'कैश प्वाइंट्स' और ऑस्ट्रेलिया में 'मनी मशीन' के नाम से भी जाना जाता है।

IANS इनपुट के साथ

Ashish Kushwaha
आशीष कुशवाहाauthor

<p>आशीष कुमार कुशवाहा Timesnowhindi.com में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। वह 2023 से Timesnowhindi.com के साथ जुड़े हैं। वह यहां शेयर बाजार, स्टॉक्स, IPO, पर्सनल फाइनेंस, बिजनेस न्यूज, कंपनी डेवलपमेंट, सक्सेस स्टोरी, यूटिलिटी, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और गैजेट से जुड़ी स्टोरी पर काम करते हैं। उनके पास पिछले 3 साल के भारतीय बजट को भी कवर करने का एक्सपीरियंस है। उनके पास ऑटो एक्सपो 2023 को कवर करने का अनुभव है। इसके अलावा ग्राउंड की स्टोरी और रिसर्च बेस्ड स्टोरी करने में विशेष रुचि रखते हैं। उनके पास डिजिटल मीडिया में कुल 3 साल से ज्यादा का एक्सपीरियंस है। इससे पहले इन्होंने वन इंडिया, दैनिक भास्कर डिजिटल में काम किया है। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वहीं ग्रेजुएशन की पढ़ाई रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से मास कम्यूनिकेशन में की है। उन्हें शुरू से ही डिबेट करने, सामाजिक मुद्दों पर बात करने और शेयर बाजार में रुचि थी। उन्हें बचपन से ही अखबार के संपादकीय पेज और न्यूज पढ़ने का सौख था। स्कूल के समय उन्होंने कई क्विज कंपटीशन में भी हिस्सा लिया और प्राइज जीते हैं।</p>

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