Made in India Defence Export : भारत आज भी दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों में गिने जाता है। लेकिन, धीरे-धीरे यह पहचान बदल रही है। क्योंकि, अब भारत सिर्फ डिफेंस आयातक ही नहीं रह गया है। बल्कि, ग्लोबल स्टेज पर एक बड़े डिफेंस निर्यातक के तौर पर भी उभर रहा है। पिछले 10 साल में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 56 गुना तक बढ़ गया है। इसके अलावा आज दुनिया के 80 देशों में मेड इन इंडिया रक्षा उत्पादों का इस्तेमाल हो रहा है।
बढ़ रहा डिफेंस इंडस्ट्री का आकार
भारत का रक्षा निर्यात पिछले एक दशक में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वर्ष 2013-14 में जहां रक्षा निर्यात सिर्फ 686 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया। यानी करीब 56 गुना की छलांग देखने को मिली है। अब भारत के रक्षा उत्पाद 80 से ज्यादा देशों तक पहुंच रहे हैं और 145 से अधिक भारतीय कंपनियां रक्षा निर्यात में सक्रिय हैं। इस बढ़ोतरी में सरकारी रक्षा कंपनियों के साथ निजी क्षेत्र की भी बड़ी भूमिका रही है।
ब्रह्मोस से लेकर आकाश और पिनाका की मांग
भारत की सबसे बड़ी ताकत ब्रह्मोस मिसाइल बनकर उभरी है। फिलीपींस के बाद अब वियतनाम ने भी ब्रह्मोस खरीदने का समझौता किया है, जबकि इंडोनेशिया के साथ बातचीत अंतिम दौर में है। इसके अलावा आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, अत्याधुनिक रडार और एटीएजीएस तोप जैसे स्वदेशी हथियार भी विदेशी देशों को आकर्षित कर रहे हैं। आर्मेनिया इन प्रणालियों का इस्तेमाल भी शुरू कर चुका है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा भरोसा
मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय हथियारों की विश्वसनीयता और बढ़ गई। भारतीय रक्षा प्रणालियों ने वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपनी क्षमता साबित की, जिसके बाद कई देशों ने भारतीय हथियारों में नई रुचि दिखाई। अब विदेशी खरीदार सिर्फ तकनीकी आंकड़ों पर नहीं बल्कि युद्ध में साबित प्रदर्शन के आधार पर भी फैसले ले रहे हैं। भारत सरकार ने 2029-30 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए भारत दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातकों में अपनी जगह और मजबूत करता दिखाई दे रहा है।
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