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World Heart Day : हार्ट अटैक के इलाज में लग सकते हैं लाखों रुपये, Emergency से पहले ऐसे करें पैसों का इंतजाम

हार्ट की बीमारी सिर्फ सेहत ही नहीं, आपकी जेब पर भी बड़ा असर डाल सकती है। हार्ट अटैक, एंजियोप्लास्टी या सर्जरी का खर्च लाखों रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में Health Insurance और Emergency Fund पहले से तैयार रखना जरूरी है।

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Emergency से पहले ऐसे करें पैसों का इंतजाम

हर साल 29 सितंबर को World Heart Day मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को दिल की बीमारियों के प्रति जागरूक करना है। हार्ट से जुड़ी बीमारी अचानक सामने आ सकती है और ऐसे समय में इलाज के साथ-साथ पैसों की जरूरत भी बढ़ जाती है। भारत में कार्डियोवस्कुलर बीमारियों के कारण हर साल बड़ी संख्या में मौतें होती हैं। वहीं, हार्ट से जुड़ी गंभीर बीमारी का इलाज कई लाख रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में सिर्फ बीमारी से बचने की कोशिश करना ही जरूरी नहीं है, बल्कि मेडिकल इमरजेंसी के लिए आर्थिक तैयारी करना भी जरूरी है।

कितना आता है खर्च?

हार्ट अटैक या दूसरी गंभीर कार्डियक समस्या होने पर अस्पताल में भर्ती होने का खर्च काफी बढ़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, Acute Myocardial Infarction या Acute Coronary Syndrome के इलाज में ICU की जरूरत पड़ने पर करीब 2 से 4 लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं। वहीं, Coronary Angiography के साथ अस्पताल में भर्ती होने पर करीब 60 हजार से 1.5 लाख रुपये और Angiography के साथ Angioplasty कराने पर लगभग 3.5 से 5 लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं। जटिल मामलों में यह खर्च 6 लाख रुपये से भी ज्यादा हो सकता है।

अगर मरीज को Bypass Surgery की जरूरत पड़ती है तो खर्च और बढ़ सकता है। Coronary Artery Bypass Grafting यानी CABG की लागत करीब 4.5 से 6.5 लाख रुपये तक हो सकती है और बड़े या प्रीमियम अस्पतालों में यह 7 से 8 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। वहीं, कुछ Valve Replacement जैसी सर्जरी में 8 से 16 लाख रुपये या उससे ज्यादा खर्च हो सकता है। अस्पताल और शहर के हिसाब से इलाज की कीमत में अंतर भी हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, समान प्रक्रियाओं का खर्च कई बार Tier-2 शहरों में बड़े महानगरों की तुलना में करीब 30-40 फीसदी कम हो सकता है।

कैसे मैनेज करें हेल्थ इंश्योरेंस?

ऐसे बड़े खर्च से बचने के लिए Health Insurance बेहद जरूरी हो जाता है। रिपोर्ट में महानगरों में रहने वाले लोगों के लिए 15 से 20 लाख रुपये की Base Health Insurance Policy पर विचार करने की सलाह दी गई है। इसके साथ 40 से 50 लाख रुपये का Super Top-up Cover भी एक अतिरिक्त सुरक्षा दे सकता है। Super Top-up का फायदा यह है कि तय Deductible पूरा होने के बाद अतिरिक्त मेडिकल खर्च को यह कवर कर सकता है।

Health Insurance लेते समय सिर्फ Sum Insured देखकर पॉलिसी नहीं खरीदनी चाहिए। Room Rent Limit, ICU Limit, Co-payment, बीमारी से जुड़ी Sub-limits, Exclusions और Pre-existing Disease की Waiting Period जैसी शर्तों को ध्यान से समझना जरूरी है। साथ ही यह भी देखना चाहिए कि आपके आसपास के बड़े Cardiac Hospitals Insurance Company के Cashless Network में शामिल हैं या नहीं। Emergency के समय यह सुविधा काफी मददगार हो सकती है।

ये इंश्योरेंस भी आ सकता है काम

इसके अलावा Critical Illness Insurance भी आर्थिक सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत दे सकता है। ऐसी पॉलिसी में पॉलिसी की शर्तों के अनुसार गंभीर बीमारी का पता चलने पर एक तय रकम Lump Sum के तौर पर मिल सकती है। इस पैसे का इस्तेमाल इलाज के अलावा दवाइयों, आने-जाने के खर्च, घर के खर्च या बीमारी के दौरान कम हुई आय को संभालने में किया जा सकता है। हालांकि, हर पॉलिसी में Heart Attack की परिभाषा और Claim की शर्तें अलग हो सकती हैं, इसलिए खरीदने से पहले नियम पढ़ना जरूरी है।

सिर्फ Insurance होना ही काफी नहीं है। परिवार के पास एक अलग Emergency Fund भी होना चाहिए। अस्पताल में इलाज के अलावा यात्रा, रहने, दवाइयों, घर पर देखभाल, Physiotherapy और Follow-up Tests जैसे खर्च भी हो सकते हैं, जिन्हें हर बार Health Insurance से कवर नहीं किया जाता। रिपोर्ट में स्वस्थ व्यक्ति के लिए 6 से 12 महीने के Household Expenses के बराबर Emergency Fund रखने की बात कही गई है। पहले से Cardiac Condition वाले व्यक्ति के लिए यह रकम 12 से 24 महीने के खर्च तक रखने की सलाह दी गई है।

इसलिए World Heart Day पर दिल की सेहत के साथ अपनी Financial Health पर भी ध्यान देना जरूरी है। सही Health Insurance, जरूरत के मुताबिक Super Top-up, Critical Illness Cover और पर्याप्त Emergency Fund मिलकर किसी अचानक आने वाली Cardiac Emergency के समय परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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