World Economic Forum: स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक व्यापक आर्थिक माहौल के बीच, भारत वृद्धि और स्थिरता की मिसाल पेश कर रहा है। भारत मजबूत घरेलू मांग के साथ तीव्र आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। आरबीआई गवर्नर दास ने कहा कि जीडीपी वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 7.2 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष में 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में सरकार ने जो संरचनात्मक सुधार किए, उनसे भारतीय अर्थव्यवस्था की मध्यम, दीर्घकालिक वृद्धि संभावनाओं को बल मिला है। उन्होंने विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक के दौरान 'उच्च वृद्धि, कम जोखिम: भारत की कहानी' विषय पर आयोजित CII सत्र में कहा कि वैश्विक आर्थिक मोर्चे पर महंगाई दर में गिरावट हुई है, लेकिन वृद्धि दर कम बनी हुई है।
कम हो रही है महंगाई
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक 2024 में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विकास और स्थिरता की तस्वीर पेश करता है और वित्त वर्ष 2024-25 में अर्थव्यवस्था 7 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। वैश्विक व्यापक आर्थिक मोर्चे पर हालिया जानकारी आश्वस्त करने वाली रही है। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे लक्ष्य के करीब आ रही है, यहां तक कि करीब सभी देशों में भारत का विकास उम्मीद से बेहतर रहा है। वित्तीय स्थितियां आसान हो गई हैं और बाजार नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय अर्थव्यवस्था 7 फीसदी की दर से बढ़ेगी।
तेजी से बढ़ रही है भारतीय अर्थव्यवस्था
दास ने कहा कि मजबूत घरेलू मांग के कारण भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने वास्तविक जीडीपी वृद्धि के बारे में आशावाद व्यक्त करते हुए चालू वित्त वर्ष में इसके 7.2 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद जताई। गवर्नर दास ने मजबूत वृद्धि का श्रेय हाल के वर्षों में सरकार द्वारा लागू किए गए संरचनात्मक सुधारों को दिया। जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था की मध्यम और दीर्घकालिक विकास संभावनाएं बढ़ी हैं। दास ने कहा कि मजबूत घरेलू मांग के साथ भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। इस वित्तीय वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
विभिन्न देशों में अपेक्षा तेजी हो रहा है विकास
गवर्नर दास ने मौद्रिक नीति एक्शन के सकारात्मक प्रभाव पर जोर दिया। यह देखते हुए कि मुद्रास्फीति 2022 की गर्मियों में देखी गई ऊंचाई से काफी हद तक कम हो गई है। उन्होंने कहा कि हाल के वैश्विक व्यापक आर्थिक विकास आश्वस्त कर रहे हैं। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे लक्ष्य के करीब पहुंच रही है और विकास बेहतर हो रहा है। विभिन्न देशों के अपेक्षा अधिक है।
