बिजनेस

World Bank चीफ ने बताया क्या है युद्ध से भी बड़ा खतरा, क्यों करोड़ों लोगों के सामने रोजगार का संकट

विश्व बैंक प्रमुख अजय बंगा का कहना है कि युद्ध से भी बड़ा खतरा ग्लोबल इकोनॉमी पर मंडरा रहा है। युद्ध खत्म हो जाए, फिर भी करोड़ों लोगों के सामने रोजगार का संकट टलता हुआ नहीं दिख रहा है।

Image

विश्व बैंक प्रमुख ने बताया क्या है बड़ा संकट (इमेज क्रेडिट, वर्ल्ड बैंक)

World Bank चीफ अजय बंगा ने ग्लोबल इकोनॉमी को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। एक इंटरव्यू में बंगा ने कहा कि यूएस-ईरान जंग खत्म होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत जरूर मिलेगी। लेकिन, करोड़ों लोगों के लिए रोजगार का संकट फिर भी बना रहेगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से दुनिया के सामने महंगाई के साथ ही एक और बड़ा खतरा उभर रहा है। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने चेताया है कि आने वाले वर्षों में रोजगार की भारी कमी वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर सकती है, जो करोड़ों युवाओं के भविष्य को सीधे प्रभावित करेगी।

रोजगार का बढ़ता गैप बना ग्लोबल खतरा

Ajay Banga ने स्पष्ट किया कि विकासशील देशों में अगले 10 से 15 वर्षों में करीब 1.2 अरब लोग कामकाजी उम्र में पहुंचेंगे, लेकिन मौजूदा ट्रेंड के हिसाब से सिर्फ 40 करोड़ नौकरियां ही पैदा हो पाएंगी। इसका सीधा मतलब है कि करीब 80 करोड़ नौकरियों का भारी अंतर सामने खड़ा होगा, जो वैश्विक स्तर पर असंतुलन पैदा कर सकता है।

युद्ध से ज्यादा गंभीर दीर्घकालिक चुनौती

World Bank और International Monetary Fund (IMF) की बैठकों के बीच बंगा ने कहा कि युद्ध और जियोपॉलिटिकल तनाव फिलहाल सुर्खियों में हैं, लेकिन असली खतरा लॉन्ग टर्म जॉब क्राइसिस है। उनका मानना है कि दुनिया को एक साथ शॉर्ट टर्म झटकों और लंबी अवधि की चुनौतियों से निपटना होगा, वरना आर्थिक स्थिरता प्रभावित होगी।

समाधान नहीं मिला तो बढ़ेगा असंतुलन

बंगा के मुताबिक अगर रोजगार सृजन नहीं हुआ तो इसके गंभीर सामाजिक परिणाम सामने आ सकते हैं। बड़े पैमाने पर अवैध माइग्रेशन, सामाजिक अस्थिरता और आर्थिक असमानता तेजी से बढ़ सकती है। पहले से ही दुनिया में विस्थापन के आंकड़े रिकॉर्ड स्तर पर हैं, जो इस खतरे को और गंभीर बनाते हैं।

World Bank Warning

विश्व बैंक की बड़ी चेतावनी

इन सेक्टरों में छिपा रास्ता

विश्व बैंक का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं, पर्यटन और वैल्यू एडेड मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर रोजगार सृजन के बड़े स्रोत बन सकते हैं। ये ऐसे क्षेत्र हैं जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं और तेजी से बदलती तकनीक, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, से कम प्रभावित होते हैं।

प्राइवेट सेक्टर पर टिकी उम्मीद

बंगा ने जोर देकर कहा कि इस चुनौती से निपटने में प्राइवेट सेक्टर की भूमिका बेहद अहम होगी। Reliance Industries और Mahindra Group जैसी कंपनियां ग्लोबल स्तर पर विस्तार कर रही हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं। विश्व बैंक अब नीतिगत सुधार और निवेश को आसान बनाने पर काम कर रहा है ताकि अधिक से अधिक निजी निवेश आकर्षित किया जा सके।

क्या है समाधान?

दुनिया इस समय युद्ध और महंगाई जैसे तात्कालिक संकटों से जूझ रही है, लेकिन असली चुनौती रोजगार की है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दशक में नौकरियों की भारी कमी वैश्विक अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा जोखिम बन सकती है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

और पढ़ें
End of Article