Petrol-Diesel price hike: ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमत रिकॉर्ड हाई पर पहुंच चुकी है। इससे तेल से गैस का आयात बिल तेजी से बढ़ा है। भारत पर भी इस युद्ध का बहुत बुरा असर हुआ है। क्रूड की कीमतों में उछाल के बाद सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में भारी बढ़ोतरी की है। अब आशंका है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे? इस बीच सरकारी सूत्रों से इसको लेकर जानकारी आई है।
PTI ने शुक्रवार को सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता। इसकी वजह यह है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बीच, खुदरा दरों पर चार साल से लगी रोक के कारण तेल कंपनियों का नुकसान लगातार बढ़ रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल
इस हफ्ते अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया। कीमतें कुछ समय के लिए चार साल के उच्चतम स्तर $126 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जिसके बाद उनमें थोड़ी नरमी आई, लेकिन वे $110 से ऊपर ही बनी रहीं। कीमतों में इस लगातार बढ़ोतरी की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही में आई रुकावट और अमेरिका तथा ईरान के बीच बढ़ा तनाव है। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता ठप पड़ी है और दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर तीखी बयानबाज़ी कर रहे हैं।
नुकसान के बावजूद नहीं बढ़े दाम
ईरान संकट शुरू होने से सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद भी पेट्रोल, डीजल और घरेलू LPG की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। हालांकि, सरकारी तेल कंपनियों ने इनपुट लागत के हिसाब से कमर्शियल LPG, इंडस्ट्रियल डीजल, 5-किलो वाले LPG सिलेंडर और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को सप्लाई किए जाने वाले जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ा दी हैं।
पेट्रोल-डीजल पर हो रहा भारी नुकसान
तेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को इस समय पेट्रोल और डीजल पर भारी नुकसान हो रहा है क्योंकि अप्रैल 2022 की शुरुआत से पंप की कीमतें जस की तस बनी हुई हैं। हालांकि, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 के पहले 9 महीनों में, देश की चार प्रमुख तेल कंपनियों ने कुल ₹1.37 लाख करोड़ का मुनाफा कमाया।
