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आपका इंश्योरेंस क्यों हो रहा है महंगा? RBI की रिपोर्ट ने बताई असली वजह

हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस के बढ़ते प्रीमियम ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ताज़ा रिपोर्ट ने इस बढ़ोतरी की असली वजह सामने रखी है और बताया है कि इंश्योरेंस कंपनियों की कौन-सी रणनीतियां सीधे आपकी जेब पर असर डाल रही हैं। आइए आपको भी बताते हैं...

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अगर आपको भी लगता है कि पिछले कुछ सालों में आपका हेल्थ, लाइफ या जनरल इंश्योरेंस लगातार महंगा होता जा रहा है, तो आप अकेले नहीं हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ताज़ा रिपोर्ट ने इस सवाल का साफ जवाब दिया है कि आखिर बीमा प्रीमियम क्यों बढ़ रहा है। RBI के मुताबिक, इंश्योरेंस महंगा होने की बड़ी वजह कंपनियों की बढ़ती लागत और उनकी वितरण (डिस्ट्रिब्यूशन) रणनीतियां हैं, न कि बेहतर सेवा या बढ़ी हुई दक्षता।

RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में कहा गया है कि बीमा सेक्टर में ऊपर से सब कुछ स्थिर दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर कई ऐसे दबाव हैं जो आने वाले समय में पॉलिसीधारकों पर असर डाल सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बीमा कंपनियां अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए भारी खर्च कर रही हैं और उसी का बोझ धीरे-धीरे ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है।

RBI ने बताया क्यों महंगा हो रहा इंश्योरेंस

RBI ने साफ कहा है कि बीमा प्रीमियम में जो बढ़ोतरी हो रही है, वह ऑपरेशनल एफिशिएंसी यानी कामकाज में सुधार की वजह से नहीं है। असली वजह है कंपनियों की हाई-कॉस्ट डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रैटेजी, जिसमें एजेंटों और बिचौलियों को दिए जाने वाले कमीशन और दूसरे खर्च बहुत ज्यादा हैं। यही लागत अंत में प्रीमियम बढ़ाकर ग्राहकों से वसूली जाती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, खासकर जीवन बीमा सेक्टर में नई पॉलिसी बेचने की लागत काफी ऊंची बनी हुई है। कंपनियां एजेंट्स को आकर्षित करने और नए ग्राहक जोड़ने के लिए मोटा कमीशन देती हैं। समस्या यह है कि जब कंपनियों का स्केल यानी कारोबार का आकार बढ़ता है, तब भी इसका फायदा सीधे पॉलिसीधारकों तक नहीं पहुंच पाता। यानी कंपनी बड़ी हो रही है, लेकिन ग्राहक को सस्ती पॉलिसी का फायदा नहीं मिल रहा।

RBI ने यह भी बताया कि बीमा सेक्टर में डिजिटलीकरण से लागत कम होने की उम्मीद थी, लेकिन इसके फायदे अभी पूरी तरह सामने नहीं आए हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, डिजिटल पॉलिसी और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के बावजूद कंपनियों का खर्च कम नहीं हुआ है। इसकी वजह यह है कि डिजिटल सिस्टम के साथ-साथ पारंपरिक एजेंट नेटवर्क भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, जिससे खर्च दोगुना हो रहा है।

RBI ने दी चेतावनी

रिपोर्ट में चेतावनी देते हुए कहा गया है कि अगर बीमा कंपनियों का खर्च इसी तरह ऊंचा बना रहा, तो इसका असर उनके मुनाफे और पूरे सेक्टर की स्थिरता पर पड़ सकता है। लंबे समय में इससे बीमा कवरेज का विस्तार भी प्रभावित हो सकता है और आम लोगों के लिए बीमा और महंगा हो सकता है।

वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024-25 में बीमा कंपनियों की कुल प्रीमियम आय बढ़कर 11.9 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि 2020-21 में यह 8.3 लाख करोड़ रुपये थी। हालांकि कुल आय बढ़ी है, लेकिन RBI का कहना है कि जीवन बीमा और गैर-जीवन बीमा दोनों क्षेत्रों में ग्रोथ की रफ्तार अब धीमी पड़ रही है। यानी प्रीमियम बढ़ने के बावजूद नए ग्राहक उतनी तेजी से नहीं जुड़ रहे।

रिपोर्ट में सरकारी और निजी बीमा कंपनियों के बीच अंतर भी सामने आया है। सार्वजनिक जीवन बीमा कंपनियां आमतौर पर खर्च को नियंत्रित रखने पर ज्यादा जोर देती हैं और उनकी अधिग्रहण लागत कम होती है। वहीं, निजी बीमा कंपनियों में एजेंट कमीशन और दूसरे प्रोत्साहनों पर खर्च तेजी से बढ़ा है, जो प्रीमियम बढ़ने की एक बड़ी वजह बन रहा है।

क्या है रिजर्व बैंक का कहना?

RBI का मानना है कि अगर बीमा को सस्ता और टिकाऊ बनाना है, तो कंपनियों को अपनी लागत संरचना सुधारनी होगी। इसके लिए जरूरी है कि मध्यस्थों को मिलने वाले प्रोत्साहन को पॉलिसीधारकों के फायदे और लंबी अवधि की स्थिरता से जोड़ा जाए। साथ ही, टेक्नोलॉजी-आधारित कम-लागत वाले मॉडल अपनाने होंगे, ताकि ग्राहक को बेहतर कवरेज कम कीमत पर मिल सके।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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