शेयर बाजार में बुधवार को शुरुआती सत्र में ही निफ्टी 25,000 के अहम मनोवैज्ञानिक और टेक्निकल सपोर्ट के नीचे फिसलकर 24,900 के जोन में आ गया, जबकि सेंसेक्स में 900 अंक से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई। कमजोर सेंटीमेंट का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा और बाजार में भारी वैल्यू इरेजन देखने को मिला। मंगलवार की गिरावट के बाद भारत की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 45576003.89 करोड़ रुपये रहा, जो बुधवार सुबह की गिरावट के बाद 44957554.26 करोड़ रुपये रह गया। इस तरह बाजार खुलने के महज दो घंटे के भीतर ही बेयर्स 6,18,449.63 करोड़ रुपये का वैल्यूएशन निगल गए।
रिकवरी कमजोर
हालांकि, गिरावट के तुरंत बाद ही निफ्टी और सेंसेक्स में रिकवरी भी हुई है। निफ्टी जहां फिलहाल वापस 25 हजार की रैंज में लौट आया है। वहीं, सेंसेक्स में डे लो 458.36 अंक की रिकवरी आ चुकी है। लेकिन, मार्केट ब्रेड्थ अब भी कमजोर बनी हुई है। NSE पर ट्रेड कर रहे 3,128 स्टॉक्स में से 2,459 स्टॉक्स में गिरावट आई है। वहीं, सिफ 591 स्टॉक्स हरे निशान में ट्रेड कर रहे हैं।
निफ्टी 6 महीने के लो पर फिसला
निफ्टी का 25,000 लेवल बाजार के लिए एक बड़ा ट्रिगर पॉइंट माना जा रहा था। यह सिर्फ मनोवैज्ञानिक लेवल नहीं, बल्कि टेक्निकल चार्ट पर भी मजबूत सपोर्ट था। लेकिन जैसे ही निफ्टी 25,000 के नीचे गया, बाजार में स्टॉप-लॉस ट्रिगर होने लगे और बिकवाली ने रफ्तार पकड़ ली। दिन के दौरान निफ्टी 24,919 के आसपास तक पहुंचा, जिससे ट्रेडर्स और शॉर्ट-टर्म निवेशकों में डर और बढ़ गया।
बाजार पर बियर्स का शिकंजा
सेंसेक्स में तेज गिरावट यह संकेत दे रही है कि बाजार पर फिलहाल बियर्स की पकड़ मजबूत है। 81,100 के आसपास लो तक फिसलने के बाद सेंसेक्स का मूड पूरी तरह रिस्क-ऑफ दिखा। लगातार दो सत्रों की भारी गिरावट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है और हर उछाल पर बिकवाली का दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।
5 वजहों से गिर रहा बाजार
1. रुपये का रिकॉर्ड लो: आज की गिरावट के पीछे रुपये की कमजोरी भी बड़ी वजह बनी। रुपया डॉलर के मुकाबले 91.28 के ऑल-टाइम लो तक फिसला, जिससे बाजार में नेगेटिव संकेत गया। कमजोर रुपया इंपोर्ट कॉस्ट बढ़ाने के साथ-साथ महंगाई और करंट अकाउंट पर दबाव बढ़ाता है। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक ज्यादा सतर्क हो जाते हैं और इक्विटी से पैसा निकालने की प्रवृत्ति तेज हो जाती है।
2. FII की बिकवाली : बाजार की गिरावट में विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली सबसे बड़ा फैक्टर बनकर सामने आई। मंगलवार को FIIs ने करीब 2,938 करोड़ रुपये के शेयर बेचे और जनवरी में यह लगातार 11वां सेशन रहा जब वे नेट सेलर रहे। जब लगातार विदेशी पैसा निकलता है तो बाजार में डिमांड कमजोर पड़ती है, जिससे गिरावट गहरी होती जाती है और रिवाइवल में समय लगता है।
3. कमजोर ग्लोबल संकेत : ग्लोबल मार्केट्स की कमजोरी ने भारतीय बाजार की गिरावट को और हवा दी। US मार्केट में ओवरनाइट तेज बिकवाली दिखी, जहां Nasdaq और S&P 500 में भारी गिरावट दर्ज हुई। एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट और बिगड़ा। ऐसे माहौल में आमतौर पर ग्लोबल फंड्स रिस्क एसेट्स से दूरी बनाते हैं और सुरक्षित निवेश की तरफ शिफ्ट होते हैं।
4. India VIX में उछाल : बाजार में डर का सबसे बड़ा संकेत India VIX में उछाल के रूप में दिखा। वोलैटिलिटी इंडेक्स करीब 4% बढ़कर 13.22 के आसपास पहुंच गया। VIX बढ़ने का मतलब है कि निवेशक आगे और उतार-चढ़ाव की आशंका कर रहे हैं। ऐसे समय में ट्रेडर्स तेजी से पोजिशन कट करते हैं, जिससे बाजार में गिरावट और तेज हो सकती है।
5. जियोपॉलिटिकल टेंशन : मार्केट में सिर्फ आर्थिक कारण नहीं, बल्कि जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता भी सेंटीमेंट बिगाड़ रही है। ट्रेड-वॉर और टैरिफ से जुड़े संकेतों ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स को सतर्क किया है। ऐसे माहौल में इक्विटी से पैसा निकलकर गोल्ड, डॉलर जैसी सेफ-हेवन एसेट्स की तरफ जाता है, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ता है।
राहत कब मिलेगी?
बाजार में फिलहाल ट्रेंड कमजोर बना हुआ है और निवेशकों का फोकस अब तीन चीजों पर रहेगा FII फ्लो, रुपये की चाल और ग्लोबल संकेत। जब तक विदेशी बिकवाली थमती नहीं और ग्लोबल सेंटीमेंट स्थिर नहीं होता, तब तक वोलैटिलिटी बनी रह सकती है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने के बजाय रिस्क मैनेजमेंट और क्वालिटी स्टॉक्स पर फोकस रखें।
कितना और डूबेगा बाजार?
Choice Equity Broking के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह के मुताबिक निफ्टी 25,250 के नीचे फिसलकर अपने कंसोलिडेशन रेंज से निर्णायक रूप से टूट चुका है, इसलिए अब 25,350–25,400 का जोन मजबूत रेजिस्टेंस बन गया है और इसके नीचे बने रहने पर रिकवरी सीमित रह सकती है। एक्सपर्ट का कहना है कि निफ्टी के लिए 25,050–25,100 अहम सपोर्ट एरिया है, लेकिन अगर यह लेवल टूटता है, तो बाजार में बिकवाली और गहरी हो सकती है और निफ्टी 24,900–24,800 तक फिसल सकता है। वहीं Geojit के VK विजयकुमार के मुताबिक ग्लोबल मार्केट में रिस्क-ऑफ मूड ट्रंप के ग्रीनलैंड और टैरिफ टेंशन से बढ़ा है, जिससे ट्रेड वॉर का डर बना हुआ है और अगर यह तनाव बढ़ता है तो बाजार में आगे भी दबाव रह सकता है, जबकि हालात नरम पड़ने पर तेज रिबाउंड भी संभव है।
