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शेयर बाजार में कोहराम, सेंसेक्स 1200 और निफ्टी 400 अंक टूटा, 3 महीने के निचले स्तर पर इंडेक्स, इन 5 वजहों से आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को फ्री फॉल मोड में गिरे। Sensex जहां 1200 अंक के करीब ज्यादा टूटकर 82,100 से नीचे फिसल गया। वहीं, Nifty करीब 400 अंक की गिरावट के साथ 25,200 से नीचे गिर गया। कमजोर ग्लोबल संकेत, US टैरिफ को लेकर बढ़ती अनिश्चितता, लगातार FII आउटफ्लो और Q3 रिजल्ट्स से मिल रहे मिक्स्ड संकेतों ने निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर किया।

Market Crash

बाजार में आई सुनामी

Photo : TN Innovations

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर एक साथ कई मोर्चों से आए दबाव के चलते बुरी तरह दरकता नजर आया। आया ग्लोबल ट्रेड-वॉर की आशंका, लगातार FII आउटफ्लो, मिक्स्ड तिमाही नतीजे और रुपया-क्रूड की चाल ने निवेशकों का रिस्क-एपेटाइट कमजोर किया। इसका नतीजा यह हुआ कि बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और निफ्टी सहित बाजार के तमाम ब्रॉड और सेक्टर इंडेक्स में भारी बिकवाली देखने को मिली है। शेयर बाजार में हुई चौतरफा बिकवाली के चलते मार्केट कैप के लिहाज से निवेशकों को सिर्फ एक दिन में 10,17,297.36 करोड़ रुपये के करीब का नुकसान हुआ है। वहीं, मार्केट ट्रेंड के लिहाज से देखें, तो बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी तीन महीने के निचले स्तर पर आ गए हैं।

कहां हुई क्लोजिंग?

निफ्टी 3:20 बजे के करीब 1.57% की गिरावट के साथ 400 अंक टूटकर 25,186 पर ट्रेड कर रहा है। वहीं, सेंसेक्स 1200 अंक गिरावट के साथ 82,036 पर ट्रेड कर रहा है। वहीं, दिन के आखिर में निफ्टी 1.53% की गिरावट के साथ 353 अंक टूटकर 25,332 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 1066 अंक की गिरावट के साथ 82,180 अंक पर बंद हुआ। इस दौरान सभी ब्रॉड मार्केट इंडेक्स और सेक्टरल मार्केट इंडेक्स भी लाल निशान में नजर आए। एडवांस-डिक्लाइन रेश्यो के लिहाज से देखें, तो NSE पर ट्रेड कर रहे 3,199 स्टॉक्स में से 496 स्टॉक्स ही हरे निशान में दिखे। वहीं, 2,721 स्टॉक्स गिरावट में ट्रेड कर रहे हैं। इसके अलावा फिलहाल किसी भी छोर से इंट्रा डे रिकवरी के संकेत नहीं दिख रहे हैं।

बाजार में गिरावट के 5 बड़े फैक्टर्स

1. टैरिफ और ट्रेड-वॉर की नई चिंता

ग्लोबल मार्केट में एक बार फिर US टैरिफ पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। यूएस ट्रेजरी यील्ड में उछाल और अमेरिका व यूरोपी में ट्रेड टेंशन के बढ़ने की आशंका ने रिस्क सेंटीमेंट को कमजोर किया है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखा है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के मुताबिक, ग्रीनलैंड को लेकर यूएस-यूरोप में शुरू हुआ टैरिफ विवाद बाजार में वोलैटिलिटी बढ़ा रहा है।

2. FII की लगातार बिकवाली

भारतीय बाजार पर सबसे बड़ा दबाव लगातार विदेशी बिकवाली से बना हुआ है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) ने सोमवार को करीब 3,262.82 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह इस महीने की लगातार 10वीं सेशन की नेट बिकवाली रही। जब विदेशी फ्लो लगातार निगेटिव रहता है, तो बड़े इंडेक्स में डिप पर भी मजबूत खरीद नहीं बनती और रैली टिक नहीं पाती।

3. Q3 रिजल्ट्स से मिक्स्ड संकेत

अभी तक तीसरी तिमाही के नतीजे बाजार को साफ दिशा नहीं दे पा रहे हैं। खासकर IT सेक्टर में दबाव दिखा। विप्रो के कमजोर नियर टर्म गाइडेंस के बाद IT स्टॉक्स में बिकवाली बढ़ी और IT इंडेक्स करीब 1.1% गिरकर टॉप लूजर रहा। शुरुआती नतीजों से अभी अर्निंग रिकवरी का स्पष्ट संकेत नहीं मिला है, हालांकि आगे ऑटो सेक्टर के नतीजों के साथ तस्वीर बेहतर हो सकती है।

4. कमजोर ग्लोबल संकेत

एशियाई बाजारों में कमजोरी ने भी घरेलू सेंटीमेंट पर असर डाला। साउथ कोरिया का का Kospi पॉजिटिव था, लेकिन जापान का Nikkei, चीन का शंधाई कंपोजिट और हैंग सेंगे लाल निशान में रहे। US बाजार सोमवार को फेडरल हॉलिडे के कारण बंद रहे, लेकिन फ्यूचर्स 1% से ज्यादा गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे थे।

5. रुपया कमजोर, डॉलर डिमांड बढ़ी

रुपया करीब 8 पैसे गिरकर 90.98 प्रति डॉलर तक कमजोर हुआ। आयातकों की डॉलर डिमांड और लगातार विदेशी आउटफ्लो ने रुपये पर दबाव बनाया। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए रिटर्न रिस्क बढ़ाता है और आयात-आधारित सेक्टर्स में कॉस्ट प्रेशर की चिंता बढ़ जाती है। इसके अलावा India Vix में तेजी देखी गई है, तो निवेशकों के कमजोर सेंटिमेंट को दिखाता है।

डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

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यतींद्र लवानिया
यतींद्र लवानिया author

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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