Elon Musk On Silver prices : दुनिया के मशहूर उद्योगपति और टेस्ला व स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने चांदी की कीमतों में आई तेजी को लेकर चिंता जताई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का भाव करीब 75 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है, जो अब तक के ऊंचे स्तरों में से एक माना जा रहा है। वहीं भारत के घरेलू बाजार में भी चांदी रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर इंट्राडे ट्रेड में चांदी की कीमत 2,54,174 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।
सोशल मीडिया पर एलन मस्क की प्रतिक्रिया
एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर चांदी की कीमतों में तेज उछाल को लेकर लिखा कि यह सही नहीं है। चांदी का कई इंडस्ट्रियल प्रोसेस में उपयोग होता है। मस्क का इशारा इस बात की ओर था कि चांदी केवल निवेश की चीज नहीं है, बल्कि यह कई जरूरी उद्योगों की बुनियादी जरूरत भी है। उनकी इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गईं। एक यूजर ने लिखा कि मैंने आप सभी को चेतावनी देने की कोशिश की थी। जब एलन मस्क खुद चांदी की कीमतों को लेकर चिंतित हों, तो समझिए हालात गंभीर हैं।
क्यों जरूरी है चांदी इंडस्ट्री के लिए
चांदी का उपयोग सिर्फ गहनों या निवेश तक सीमित नहीं है। इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), डेटा सेंटर्स और कई अन्य तकनीकी उत्पादों में होता है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में चांदी की अच्छी कंडक्टिविटी इसे बेहद अहम बनाती है। सोलर पैनल में भी चांदी का उपयोग बढ़ रहा है, क्योंकि रिन्यूएबल एनर्जी की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी तरह ईवी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी चांदी की जरूरत बढ़ी है।
तेजी के पीछे क्या हैं वजहें
आईएएनएस के मुताबिक एनालिस्ट्स ने कहा कि चांदी की कीमतों में उछाल के पीछे कई कारण हैं। निवेश की मांग में तेज बढ़ोतरी, सप्लाई में कमी, इंडस्ट्रियल मांग का लगातार बढ़ना। विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी के पास सोने की तरह बड़े और सुरक्षित रिजर्व नहीं हैं। जैसे-जैसे इंडस्ट्री में इसका उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे बाजार में उपलब्ध स्टॉक कम होता जा रहा है। इसके अलावा छुट्टियों के दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम कम रहने से कीमतों में उतार-चढ़ाव और तेज हो गया।
2025 में शानदार रिटर्न, लेकिन खतरे भी
चांदी ने साल 2025 में अब तक करीब 158 प्रतिशत का जबरदस्त रिटर्न दिया है। इस शानदार प्रदर्शन के कारण कई निवेशकों ने इसे सोने और बड़े स्टॉक्स से बेहतर विकल्प माना है। हालांकि, सभी रिपोर्ट्स इतनी सकारात्मक नहीं हैं। एक्सिस म्यूचुअल फंड की एक हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि चांदी की कीमतें ओवरवैल्यूएशन के स्तर पर पहुंच सकती हैं। अगर ऐसा हुआ, तो ईटीएफ से पैसा निकल सकता है। साथ ही, अगर तांबे जैसी दूसरी इंडस्ट्रियल धातुओं की कीमतों में गिरावट आती है, तो उसका असर चांदी पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या रह सकता है असर
अगर चांदी की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और ईवी इंडस्ट्री पर पड़ सकता है। लागत बढ़ने से उत्पाद महंगे हो सकते हैं, जिसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर आएगा। एलन मस्क की चिंता इस बात का संकेत है कि चांदी की तेजी सिर्फ निवेशकों का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरी इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
