Gold Price: वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में सोना और चांदी, सुरक्षित निवेश (safe havens) माने जाते हैं। हालांकि, पहली बार ऐसा हुआ है कि ईरान युद्ध चल रहा है, जिससे पूरी दुनिया प्रभावित है, लेकिन सोने और चांदी में तेजी नहीं है। निवेशकों के लिए यह अप्रत्याशित है। बता दें कि 2025 में, इन दोनों धातुओं ने जबरदस्त रिटर्न दिया और दुनिया भर की सभी प्रमुख एसेट क्लास को पीछे छोड़ा था। पिछले चांदी में 165 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त हुई, जबकि सोने की कीमतों में 75 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल आया। तेजी का यह सिलसिला 2026 की शुरुआत में भी जारी रहा। जनवरी के आखिर में सोने की कीमतें अपने अब तक के सबसे रिकॉर्ड स्तर 5,500 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गईं, और चांदी भी रिकॉर्ड 121 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, मार्च के बाद से इसमें बिकवाली शुरू हो गई। अब जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा तो भी सोने और चांदी में तेजी लौट नहीं रही है। आखिर क्यों? क्या आने वाले समय में गिरावट आने वाली है।
सोने और चांदी की कीमतों में 22% तक की गिरावट
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अबतक सोने की कीमतों में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है, जबकि चांदी की कीमतों (Silver Price)में 22 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतों में शुरुआती तेजी ज्यादा समय तक नहीं टिकी, क्योंकि जैसा कि उम्मीद थी, यह संघर्ष एक सप्ताह के भीतर खत्म नहीं हुआ। तेल बजारों में आपूर्ति में आई रुकावटों ने आर्थिक अनिश्चितता और महंगाई के दबाव को बढ़ाया, और साथ ही अमेरिकी डॉलर को मजबूत किया।
ऐतिहासिक डेटा से पता चलता है कि किसी संघर्ष की शुरुआत में आमतौर पर सोने और चांदी की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन जब स्थिति लंबी खिंचती है, तो यह तेजी फीकी पड़ जाती है। डेटा के अनुसार, जब फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था, तो पहले हफ्ते के दौरान सोने की कीमतों में 4 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन बाद में कीमतें नरम पड़ गईं। इसी तरह, चांदी की कीमतों में भी शुरुआत में लगभग 6 प्रतिशत की तेजी आई थी, लेकिन अगले कुछ हफ़्तों में यह बढ़त बरकरार नहीं रह पाई।
क्यों आ रही गिरावट?
चांदी की औद्योगिक मांग में कमी: चांदी की कुल वैश्विक मांग का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा औद्योगिक गतिविधियों से आता है। युद्ध के कारण मांग में कमी आई है। इससे गिरावट दर्ज की गई है।
मजबूत डॉलर और बॉन्ड यील्ड: युद्ध या संकट के समय निवेशक सुरक्षा के लिए अमेरिकी डॉलर और सरकारी बॉन्ड की ओर रुख करते हैं । डॉलर मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना-चांदी महंगे हो जाते हैं, जिससे खरीदारों की दिलचस्पी कम हो जाती है ।
ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम होना: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई का डर बढ़ा दिया है। इस कारण केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है। ऊंची ब्याज दरें निवेशकों को कीमती धातुओं के बजाय ब्याज देने वाली संपत्तियों की ओर आकर्षित करती हैं ।
केंद्रीय बैंकों द्वारा बिक्री: अपनी करेंसी को स्थिर करने के लिए रूस और तुर्की जैसे देशों ने अपने सोने के भंडार का बड़ा हिस्सा बाजार में बेचा है, जिससे सप्लाई बढ़ गई है और कीमतों पर दबाव आया है ।
मुनाफावसूली: पिछले दिनों आई तेजी के बाद अब शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स अपनी पोजीशन बेच रहे हैं (Unwinding), जिससे बाजार में 'फोर्स्ड सेलिंग' की स्थिति बन गई है।
क्या और सस्ता होगा सोना और चांदी?
सर्राफा बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल सोने और चांदी में 2025 जैसा रिटर्न मिलने की उम्मीद बिल्कुल नहीं है। जहां तक कीमत में गिरावट की बात है तो यह युद्ध खत्म होने के बाद साफ हो पाएगा की इन दोनों कीमती धातु में तेजी लौटेगी या गिरावट आएगी। इसलिए निवेशकों को अभी सर्तक रुख अपनाने की जरूरत है।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। बिज़नेस (Business News) अपडेट और आज का सोने का भाव (Gold Rate Today), आज की चांदी का रेट (Silver Rate Today) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।
