Wholesale Inflation:थोक महंगाई दर में लगातार छठे महीने गिरावट आई है। सिंतबर में यह शून्य से 0.26 प्रतिशत नीचे रही है। थोक महंगाई दर अप्रैल से लगातार शून्य से नीचे बनी हुई है। गस्त में यह शून्य से 0.52 प्रतिशत नीचे थी। जबकि सितंबर 2022 में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर 10.55 प्रतिशत थी। महंगाई दर में कमी की प्रमुख वजह रासायनिक तथा रासायनिक उत्पादों, खनिज तेल, कपड़ा, प्रमुख मेटल और खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट होना रहा है। इसके पहले सितंबर में रिटेल महंगाई दर भी गिरकर 3 महीने के निचले स्तर पर आ गई थी।
क्यों कम हुई महंगाई दर
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि सितंबर 2023 में मुख्य रूप से पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में रासायनिक तथा रासायनिक उत्पादों, खनिज तेल, कपड़ा, बुनियादी धातुओं व खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट के कारण महंगाई कम हुई। खाद्य वस्तुओं की महंगाई पिछले दो महीनों में दोहरे अंक में रहने के बाद, सितंबर में घटकर 3.35 प्रतिशत हो गई। अगस्त में यह 10.60 प्रतिशत थी। इसी तरह ईंधन व बिजली की महंगाई सितंबर में शून्य से 3.35 प्रतिशत नीचे रही, जो अगस्त में शून्य से 6.03 प्रतिशत नीचे थी।इसके अलावा विनिर्मित उत्पादों की महंगाई सितंबर में शून्य से 1.34 प्रतिशत नीचे रही। अगस्त में यह शून्य से 2.37 प्रतिशत नीचे थी।
रिटेल महंगाई का क्या है हाल
राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) की ओर से पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में खुदरा मुद्रास्फीति सालाना आधार पर घटकर तीन महीनों के निचले स्तर 5.02 प्रतिशत पर आ गई। सब्जियों एवं ईंधन की कीमतें कम होना इसकी मुख्य वजह रही। थोक के साथ-साथ रिटेल महंगाई दर का गिरना आरबीआई के लिए राहत लेकर आया है। इसकी वजह से आने वाले दिनों में आरबीआई एक बार फिर से सस्ते कर्ज के ट्रैक पर लौट सकता है।
