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कौन थे एस बी रवि पंडित? पुणे में ली अंतिम सांस, KPIT टेक्नोलॉजीज को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया

SB Ravi Pandit Death: KPIT के सह-संस्थापक और चेयरमैन एस.बी. रवि पंडित का पुणे में निधन हो गया। उन्होंने कंपनी को वैश्विक ऑटोमोबाइल सॉफ्टवेयर लीडर बनाया और समाज, पर्यावरण व नीति निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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SB Ravi Pandit का निधन: KPIT के फाउंडर और चेयरमैन ने पुणे में ली अंतिम सांस

SB Ravi Pandit Death : केपीआईटी टेक्नोलॉजीज (KPIT Technologies) लिमिटेड के सह-संस्थापक और लंबे समय तक चेयरमैन रहे एस बी रवि पंडित (SB Ravi Pandit) का निधन हो गया है। कंपनी ने गुरुवार को एक एक्सचेंज फाइलिंग के जरिए इस दुखद खबर की पुष्टि की। रवि पंडित का निधन 8 मई 2026 की सुबह पुणे में हुआ। कंपनी ने अपने बयान में कहा कि हम अपने संस्थापक और बोर्ड के चेयरमैन एस. बी. रवि पंडित के निधन से अत्यंत दुखी हैं। रवि पंडित का जाना भारतीय आईटी और ऑटोमोबाइल सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

MIT से पढ़ाई कर भारत में बनाई वैश्विक कंपनी

रवि पंडित ने अमेरिका के प्रतिष्ठित एमआईटी (MIT) के स्लोन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से पढ़ाई की थी। उन्होंने वर्ष 1990 में किशोर पाटिल के साथ मिलकर KPIT (तब KPIT Cummins के नाम से जाना जाता था) की स्थापना की। शुरुआत में यह कंपनी एक सामान्य आईटी सर्विसेज फर्म थी, लेकिन धीरे-धीरे उनके नेतृत्व में यह ऑटोमोबाइल और मोबिलिटी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में विशेषज्ञ कंपनी बन गई। आज KPIT दुनिया भर में अपनी सेवाओं के लिए जानी जाती है और इसका नेटवर्क लगभग 15 देशों तक फैला हुआ है। कंपनी की तकनीक का उपयोग अमेरिका, यूरोप और एशिया में लाखों वाहनों में किया जाता है।

ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी में बड़ा योगदान

रवि पंडित ने भारत को ग्लोबल ऑटोमोबाइल सॉफ्टवेयर सेक्टर में एक मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सोच और नेतृत्व में KPIT ने इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्ट मोबिलिटी और ऑटोमेशन तकनीकों के क्षेत्र में बड़ी प्रगति की। उनकी कोशिशों से कंपनी ने पारंपरिक आईटी सेवाओं से आगे बढ़कर भविष्य की तकनीकों पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे यह वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग कंपनी बन गई।

सामाजिक और पर्यावरणीय क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका

रवि पंडित सिर्फ एक बिजनेस लीडर ही नहीं थे, बल्कि समाज और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों में भी बहुत सक्रिय थे। उन्होंने पुणे इंटरनेशनल सेंटर और जनवाणी जैसे संस्थानों की सह-स्थापना और मार्गदर्शन किया। उन्होंने गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स (GIPE) के सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट को भी सहयोग दिया। इसके अलावा वे Jnana Prabodhini के अध्यक्ष भी रहे और शिक्षा एवं सामाजिक विकास में योगदान देते रहे। वे World Resources Institute India और Aga Khan Rural Support Programme India जैसे संगठनों के बोर्ड में भी शामिल रहे, जहां उन्होंने पर्यावरण और ग्रामीण विकास की नीतियों को मजबूत करने में भूमिका निभाई।

कंपनी के शेयरों पर असर

उनके निधन की खबर के बाद KPIT टेक्नोलॉजीज के शेयरों में हल्की गिरावट देखी गई। शेयर करीब 1.5% गिरकर 712.5 रुपये पर कारोबार कर रहे थे, जबकि पिछले दिन यह 724.3 रुपये पर बंद हुए थे। पिछले एक साल में कंपनी के शेयरों में करीब 44% की गिरावट दर्ज की गई है।

एक युग का अंत

रवि पंडित का जाना भारतीय तकनीकी और सामाजिक क्षेत्र में एक युग के अंत जैसा माना जा रहा है। उन्होंने न सिर्फ एक सफल कंपनी खड़ी की, बल्कि भारत को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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