8th Pay Commission : 8वें वेतन आयोग के गठन को लेकर बना सस्पेंस अब जल्द ही खत्म होने वाला है। हालांकि केंद्र सरकार ने अभी तक इसकी आधिकारिक समयसीमा को लेकर चुप्पी साध रखी है, लेकिन एक प्रमुख हितधारक ने खुलासा किया है कि इसका फैसला निकट भविष्य में लिया जाएगा। प्रमुख हितधारकों ने कहा कि 8वें वेतन आयोग के लिए संदर्भ की शर्तें (Terms Of Reference) जल्द ही केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि वे उसके अनुसार अपनी विभिन्न मांगों को तैयार करेंगे, जिनमें फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम वेतन से संबंधित मांगें भी शामिल हैं।
जल्द मिल सकती है मंजूरी
NDTV-Profit की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (JCM) के स्टाफ साइड सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने कहा है कि 8वें वेतन आयोग को लेकर मंजूरी उम्मीद से पहले मिल सकती है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार इस पर काम कर रही है और इसकी स्वीकृति कभी भी मिल सकती है। इसी रिपोर्ट में एक अन्य सदस्य, जिन्होंने नाम जाहिर नहीं किया। उन्होने बताया कि टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी बहुत जल्द मिल जाएगी। हालांकि टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम इन दावों की पुष्टि नहीं करता है। गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में ऐसी खबरें आई थीं कि टर्म्स ऑफ रेफरेंस को मार्च के अंत तक मंजूरी मिल सकती है।
टर्म्स ऑफ रेफरेंस क्यों महत्वपूर्ण?
टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) वे बुनियादी दिशा-निर्देश होते हैं जो वेतन आयोग (Central Pay Commission – CPC) के कार्यक्षेत्र और दायरे को तय करते हैं। ये यह स्पष्ट करते हैं कि आयोग किन विषयों पर विचार करेगा, किन पहलुओं की समीक्षा करेगा और किन सिफारिशों की संभावना होगी। एक बार ToR को मंजूरी मिल जाती है, तो केंद्र सरकार औपचारिक रूप से वेतन आयोग का गठन कर सकती है। पहले उम्मीद थी कि 8वें वेतन आयोग का गठन अप्रैल 2025 के पहले सप्ताह में हो जाएगा। लेकिन अब इस देरी के कारण आयोग की रिपोर्ट मार्च 2026 से आगे खिसक सकती है।
सामान्यत: वेतन आयोगों को अपनी रिपोर्ट तैयार करने में करीब 12 महीने का समय लगता है। मार्च 2025 में वित्त मंत्रालय ने कहा था कि कुछ इनपुट्स अभी लंबित हैं। ToR को मंजूरी मिलने के बाद, केंद्र सरकार आयोग के गठन की अधिसूचना (Notification) जारी करेगी।
8वें वेतन आयोग का गठन अब नजदीक है, और इसकी प्रक्रिया ToR की मंजूरी के साथ ही औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी। लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें इस फैसले पर टिकी हुई हैं, जो उनकी वेतन और भत्तों की संरचना को सीधे प्रभावित करेगा।
