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शेयर बाजार में फिर धमाल मचाने को तैयार मुकेश अंबानी की कंपनी RIL, ये है बड़ा कारण

मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने तेल-से-रसायन, रिटेल और जियो टेलीकॉम सेक्टर में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। रिटेल और नई ऊर्जा क्षेत्रों में तेजी और आने वाले आईपीओ से RIL के शेयर में तेजी आने की संभावना है। आइए जानते हैं ब्रोकरेज फर्मों की RIL शेयर पर क्या है राय?

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RIL Share Price

मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने Q2FY26 में जोरदार प्रदर्शन दर्ज किया है, जिसने इसके शेयरों पर अच्छा असर डाला है। कंपनी के यह शानदार नतीजे मुख्य रूप से इसके तेल-से-रसायन (O2C), रिटेल और टेलीकॉम बिजनेस की बढ़त की वजह से आए हैं। खासकर O2C सेक्टर RIL के लिए बेहद अहम है क्योंकि इसी के जरिए भविष्य में अपनी सहायक कंपनियों की लिस्टिंग की योजना बनाई जा रही है।

शानदार नतीजों के पीछे की वजह

RIL की कुल कमाई (EBITDA) Q2FY26 में ₹45,885 करोड़ रही, जो पिछले साल के मुकाबले 17.5% ज्यादा है। इसमें O2C सेक्टर की रिकवरी ने सबसे बड़ा योगदान दिया। हालांकि कच्चे तेल की प्रोसेसिंग पर प्रति टन कमाई में 5% की गिरावट आई है, जो कच्चे तेल की बढ़ती खरीद लागत की वजह से है। रिटेल सेक्टर ने भी शानदार प्रदर्शन किया। साल-दर-साल राजस्व में 19% की बढ़त हुई और यह ₹79,128 करोड़ तक पहुंच गया। इसमें कंपनी के ऑपरेशन सुधार और डार्क स्टोर्स के विस्तार का बड़ा योगदान रहा। रिलायंस रिटेल अब 600 डार्क स्टोर्स चला रही है, जो उसके 20,000 स्टोर्स के पूरे नेटवर्क को सपोर्ट करते हैं।

टेलीकॉम सेक्टर की वृद्धि

जियो प्लेटफॉर्म्स ने भी कंपनी के समग्र नतीजों में मदद की। प्रति यूजर औसत राजस्व (ARPU) साल-दर-साल 8% बढ़कर ₹211 हो गया। हालांकि, क्रमिक वृद्धि केवल 1% रही, जिससे FY26 के दूसरे हाफ में ARPU की गति थोड़ी धीमी दिखाई देती है। प्रबंधन ने कहा कि फिलहाल टैरिफ बढ़ाने का कोई प्लान नहीं है।

ब्रोकरेज की राय

ब्रोकरेज फर्मों ने RIL के रिटेल और नई ऊर्जा क्षेत्रों की विकास संभावनाओं को लेकर आशावाद जताया है। मॉर्गन स्टेनली जैसी कंपनियों का मानना है कि उपभोक्ता रिटेल में सुधार और जियो प्लेटफॉर्म्स व रिलायंस रिटेल के आगामी आईपीओ, कंपनी के शेयर और बाजार की धारणा पर बड़ा असर डाल सकते हैं।

निवेशकों के लिए क्यों है मौका

जैसे-जैसे जियो अपने आईपीओ की तैयारी कर रहा है, RIL में इसकी हिस्सेदारी 66% से घटकर लगभग 63% हो सकती है। इससे होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट का सवाल उठता है, जो शेयर मूल्य को प्रभावित कर सकता है। ब्रोकरेज फर्मों ने अनुमान लगाया है कि इस डिस्काउंट की सीमा 35-40% तक हो सकती है RIL नई ऊर्जा, सौर (PV) गीगाफैक्टरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश करके भविष्य में और भी तेजी से बढ़ने की तैयारी कर रही है। कुल मिलाकर, RIL के शेयर फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन आगामी आईपीओ और रणनीतिक विकास कंपनी की कीमत और निवेशकों के भरोसे को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

(Disclaimer: यह लेख केवल सूचना देने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है और इसे किसी प्रकार की निवेश सलाह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल अपने पाठकों/दर्शकों को सलाह देता है कि किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।)

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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