SME IPO & Main Board IPO Difference: इस समय शेयर बाजार में तेजी का दौर है और इस बीच कई कंपनियां अपने-अपने आईपीओ इश्यू ला रही हैं। आईपीओ लाने के लिए कंपनियां शेयर बाजार में तेजी को बेहतर समझती हैं, क्योंकि तब निवेशक जमकर उनमें पैसा लगाते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि आईपीओ दो तरह के होते हैं। इनमें एसएमई (स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज) और मेनबोर्ड के आईपीओ शामिल हैं। स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज के नाम से ही जाहिर है कि ये छोटी कंपनियां होती हैं। वहीं मेनबोर्ड की कंपनियां साइज में बड़ी होती हैं।
क्या है अंतर
मेनबोर्ड आईपीओ अच्छी तरह से स्थापित कंपनियों के पब्लिक इश्यू होते हैं, जबकि एसएमई आईपीओ ग्रोथ पोटेंशियल ऑफर करते हैं लेकिन उनमें हाई रिस्क होता है। एसएमई आईपीओ के साथ आप कंपनी की विकास यात्रा का हिस्सा बन सकते हैं, लेकिन इसके लिए सेक्टर (जिस सेक्टर की कंपनी है) की गहरी समझ और जोखिम सहने की क्षमता होनी चाहिए।
एक निवेशक के रूप में, आपको कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ, विकास की संभावनाओं और मार्केट स्टैबिलिटी का वैल्यूएशन करना जरूरी होता है।
कहां करना होता है ज्यादा निवेश
मेनबोर्ड आईपीओ बीएसई और एनएसई एक्सचेंजों पर लिस्ट होते हैं। एसएमई आईपीओ शेयर बीएसई एसएमई या एनएसई इमर्ज एक्सचेंज पर लिस्ट होते हैं। मेनबोर्ड आईपीओ में आम तौर पर न्यूनतम आवेदन राशि करीब 14-16 हजार रु होती है। इसमें शेयरों की लॉट साइज भी 20, 30 या 40 शेयर के दायरे (कुछ मामले में इससे अधिक) की होती है।
मगर एसएमई आईपीओ में न्यूनतम आवेदन साइज 100,000 रुपये और उससे अधिक होता है और शेयरों की लॉट साइज 2000-3000 इस तरह होती है। इसीलिए इनमें अधिक निवेश करना होता है।
क्या होती है लॉट साइज
लॉट साइज का मतलब है किसी आईपीओ में कम से कम कितने शेयरों में आवेदन करना होता है। फिर उसी की गुणा में आवेदन किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर : यहां मुख्य तौर पर आईपीओ की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। इक्विटी मार्केट में जोखिम होता है, इसलिए निवेश अपने जोखिम पर करें। निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।
