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रेपो रेट क्या है? RBI के कटौती करते ही EMI कैसे हो जाती है कम, समझें पूरी बात

Repo Rate: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जब भी रेपो रेट में कटौती करता है, उसका तुरंत असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। रेपो रेट घटने पर बैंक सस्ते में कर्ज पाते हैं और ग्राहकों को कम ब्याज पर लोन देते हैं। इससे होम, ऑटो और पर्सनल लोन की EMI घटकर लोगों को राहत मिलती है।

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रेपो रेट का आम लोगों पर क्या असर पड़ता है (तस्वीर-istock)

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Repo Rate : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में बदलाव का ऐलान होते ही इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। जब भी RBI रेपो रेट घटाता है, तो बैंक भी अपने ग्राहकों के लिए लोन को सस्ता करना शुरू कर देते हैं। इसका असर यह होता है कि होम लोन, ऑटो लोन या पर्सनल लोन की EMI कम हो जाती है, जिससे लोगों को राहत मिलती है।

क्या होता है रेपो रेट?

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर RBI देश के बैंकों को शॉर्ट टर्म के लिए लोन देता है। बैंक इस पैसे का इस्तेमाल अपने दैनिक ट्रांजैक्शन और ग्राहकों को लोन देने के लिए करते हैं। अगर RBI रेपो रेट को कम कर दे, तो बैंकों को कम ब्याज पर पैसा मिलता है और वे भी ग्राहकों को कम ब्याज दर पर लोन दे सकते हैं। इसी तरह जब रेपो रेट बढ़ता है तो लोन महंगे हो जाते हैं।

रेपो रेट कम होते ही EMI क्यों कम होती है?

रेपो रेट घटने पर बैंकों का कर्ज लेने का खर्च कम हो जाता है। इसका फायदा वे ग्राहकों को रेट कट के रूप में देते हैं। ज्यादातर लोन फ्लोटिंग रेट पर आधारित होते हैं यानी जैसे ही RBI ब्याज दर में बदलाव करता है, EMI भी बदल जाती है। मान लीजिए आपका होम लोन 8.5% पर चल रहा है और रेपो रेट में कमी के बाद बैंक इसे 8% कर देता है, तो आपकी EMI अपने आप कम हो जाएगी या लोन की अवधि घट जाएगी।

रेपो रेट घटने से किन लोगों को ज्यादा फायदा

रेपो रेट में कटौती का फायदा उन लोगों को सबसे ज्यादा मिलता है जिनके लोन फ्लोटिंग रेट पर हैं। जैसे होम लोन लेने वाले, ऑटो लोन लेने वाले, पर्सनल लोन लेने वाले। इसके अलावा, जिनका लोन लंबी अवधि का है, उन्हें EMI में गिरावट ज्यादा महसूस होती है क्योंकि ब्याज का बड़ा हिस्सा सामने आता है। RBI रेपो रेट घटाता है ताकि आर्थिक गतिविधि बढ़े और लोग ज्यादा खर्च कर सकें। लेकिन इसका असली फायदा तभी मिलता है जब बैंक भी इस कटौती को ग्राहकों तक पहुंचाएं। कई बार बैंक तुरंत ब्याज दर नहीं घटाते लेकिन RBI की गाइडलाइंस के अनुसार उन्हें समय पर नई दरें लागू करनी होती हैं।

अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है?

रेपो रेट में कमी से मार्केट में पैसा सस्ता हो जाता है। आम आदमी से लेकर बिजनेस तक सभी कम ब्याज पर लोन ले सकते हैं। इससे बाजार में मांग बढ़ती है, कारोबार में निवेश बढ़ता है, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। इसके उलट रेपो रेट बढ़ने पर अर्थव्यवस्था में पैसा महंगा हो जाता है, जिससे खर्च और निवेश दोनों में कमी आती है।

रेपो रेट कम, EMI कम, जेब में राहत

कुल मिलाकर, रेपो रेट केंद्रीय बैंक का एक ऐसा टूल है जिसके जरिये वह पूरी अर्थव्यवस्था की गति को नियंत्रित करता है। जब भी RBI रेपो रेट घटाता है, लोगों की EMI कम होती है, खर्च बढ़ने लगता है और मार्केट में रौनक लौट आती है। इसलिए हर आम आदमी के लिए यह जानना जरूरी है कि रेपो रेट में एक छोटी सी कमी भी उसकी जेब को कैसे बड़ा राहत दे सकती है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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