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क्या है Panda Bonds, आखिर कैसे डूबते पाकिस्तान के लिए तिनके का सहारा साबित हुआ?

कंगाल पाकिस्तान के लिए अब पांडा बॉन्ड्स का सहारा मिला है। डूबती इकोनॉमी को बचाने के लिए पाकिस्तान ने चीनी मार्केट में पांडा बॉन्ड बेचकर करीब 26 करोड़ डॉलर जुटाए हैं। आखिर क्या होते हैं पांडा बॉन्ड?

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पांडा बॉन्ड्स से पाकिस्तान ने जुटाया सस्ता कर्ज

पाकिस्तान की इकोनॉमी पिछले कई वर्षों से उस नाव की तरह बहे जा रही है, जिसकी दिशा तय करने वाला कोई कप्तान नहीं और जिसमें दर्जनो छेद हो चुके हैं। अब पाकिस्तानी हुक्मरान कभी एक छेद बंद करते हैं, तो कभी दूसरे। इसी मशक्कत के बीच अब Pakistan ने पहली बार चीन के घरेलू बॉन्ड मार्केट में युआन-डिनॉमिनेटेड ‘Panda Bond’ जारी कर करीब 1.75 अरब युआन यानी लगभग 25.8 करोड़ डॉलर (करीब ₹2,100 करोड़) जुटाए हैं। यह पाकिस्तान का चीन के ऑनशोर कैपिटल मार्केट में पहला प्रवेश है।

क्या हैं पांडा बॉन्ड्स

Panda Bond ऐसे बॉन्ड होते हैं जिन्हें कोई विदेशी देश, कंपनी या संस्था चीन के घरेलू बाजार में चीनी करेंसी युआन में जारी करती है। इसका मकसद चीन के निवेशकों से फंड जुटाना और डॉलर पर निर्भरता कम करना होता है। इन बॉन्ड्स के जरिए उधार लेने वाले देशों को कई बार डॉलर बॉन्ड्स की तुलना में कम ब्याज दर पर कर्ज मिल जाता है। चीन इन्हें युआन को वैश्विक करेंसी बनाने की रणनीति के तहत बढ़ावा दे रहा है।

2.5% का कूपन रेट तय

तीन साल की अवधि वाले इस बॉन्ड पर सिर्फ 2.5% का कूपन तय हुआ, जो पाकिस्तान के मौजूदा डॉलर बॉन्ड्स की औसत 7.7% ब्याज दर से 500 बेसिस पॉइंट से ज्यादा कम है। यही वजह है कि इसे पाकिस्तान की अब तक की सबसे सस्ती विदेशी करेंसी फंडिंग माना जा रहा है।

चीन ने खोला खजाना

इस बॉन्ड इश्यू को निवेशकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला और यह 5 गुना से ज्यादा ओवरसब्सक्राइब हुआ। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, कम ब्याज दर और चीन के बाजार में बढ़ती युआन लिक्विडिटी ने इस इश्यू को आकर्षक बनाया। खास बात यह है कि इस बॉन्ड का 95% हिस्सा Asian Infrastructure Investment Bank (AIB) और Asian Development Bank (ADB) की गारंटी के तहत जारी हुआ। इससे जंक रेटिंग वाले पाकिस्तान के बॉन्ड को निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित माना गया।

IMF पर निर्भर पाकिस्तान को मिली राहत

पाकिस्तान इस समय भारी विदेशी कर्ज और ब्याज भुगतान के दबाव से जूझ रहा है। देश लगातार International Monetary Fund के बेलआउट पैकेज पर निर्भर है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और महंगे होते क्रूड ऑयल ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ाई हैं। तेल कीमतों में उछाल की वजह से पाकिस्तान को हाल में ब्याज दरें भी बढ़ानी पड़ी हैं। ऐसे में कम लागत पर फंड जुटाना उसकी सबसे बड़ी जरूरत बन गया था।

चीन के लिए भी रणनीतिक फायदा

यह डील सिर्फ पाकिस्तान के लिए ही नहीं बल्कि China के लिए भी अहम मानी जा रही है। चीन लंबे समय से युआन को वैश्विक करेंसी के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। 2026 में अब तक Panda Bond इश्यू 114.4 अरब युआन तक पहुंच चुका है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 70% ज्यादा है। इससे साफ है कि डॉलर के मुकाबले युआन आधारित फंडिंग तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

पाकिस्तान पर कितना विदेशी कर्ज?

पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के मुताबिक देश पर इस समय करीब 93 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज है। वहीं चालू वित्त वर्ष में देश की GDP 3.7% बढ़कर 452 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। ADB ने FY26 में पाकिस्तान की GDP ग्रोथ 3.5% और FY27 में 4.5% रहने का अनुमान जताया है, हालांकि एजेंसी ने आर्थिक जोखिमों को लेकर चेतावनी भी दी है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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