What is Natural Farming: पीएम नरेन्द्र मोदी ने बजट के बाद आयोजित तीसरे वेबिनार को संबोधित करते हुए नेचुरल फार्मिंग का जिक्र किया। उन्होंने भारत में कैमिकल फ्री खेती और नेचुरल फार्मिंग पर बल देने की बात कही। नेचुरल फार्मिंग क्या है, किस प्रकार यह एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आ रही है और इसके क्या लाभ मिलते हैं, इन सभी सवालों के जवाब इस आर्टिकल में देने जा रहे हैं-
Natural Farming एक बेहतर विकल्प
खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच लंबे समय में मिट्टी की उर्वरता कम होने लगती है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल से उत्पादन तो बढ़ता है लेकिन पर्यावरण पर नकारात्मक असर भी पड़ता है। ऐसी स्थिति में Natural Farming एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आई है।
नेचुरल फार्मिंग क्या है?
नेचुरल फार्मिंग यानी प्राकृतिक खेती एक ऐसी खेती पद्धति है जिसमें रासायनिक खाद, कीटनाशक और महंगे कृषि उत्पादों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसमें प्राकृतिक संसाधनों जैसे गोबर, गोमूत्र, जैविक खाद और पौधों से बने घोल का इस्तेमाल किया जाता है। इस खेती पद्धति का उद्देश्य मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को बनाए रखना और पर्यावरण को सुरक्षित रखना है। प्राकृतिक खेती में किसान कम लागत में अच्छी गुणवत्ता वाली फसल उगा सकते हैं।
नेचुरल फार्मिंग के फायदे
खेती की लागत कम होती है
नेचुरल फार्मिंग में महंगी रासायनिक खाद और कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती। किसान गोबर, गोमूत्र और जैविक पदार्थों से ही खाद और कीटनाशक तैयार कर सकते हैं, जिससे खेती की लागत काफी कम हो जाती है।
मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है
रासायनिक खाद के लगातार इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो जाती है। जबकि प्राकृतिक खेती में जैविक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और जीवाणु सक्रियता बढ़ती है।
पर्यावरण को नुकसान नहीं होता
प्राकृतिक खेती में किसी भी प्रकार के हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इससे मिट्टी, पानी और हवा प्रदूषित नहीं होते और पर्यावरण सुरक्षित रहता है।
स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित फसल
नेचुरल फार्मिंग से उगाई गई फसलें रसायन मुक्त होती हैं। इसलिए ये मानव स्वास्थ्य के लिए अधिक सुरक्षित और पौष्टिक मानी जाती हैं।
किसानों की आय बढ़ने की संभावना
आजकल बाजार में प्राकृतिक और जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में प्राकृतिक खेती से उगाई गई फसलों को अच्छी कीमत मिल सकती है, जिससे किसानों की आय बढ़ने की संभावना रहती है।
