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Gold-Silver Hallmarking: सोना-चांदी हॉलमार्किंग क्या है? इसके लिए कितना देना पड़ता है चार्ज

Gold-Silver Hallmarking: सोने और चांदी के गहनों गुणवत्ता और सुंदरता की गारंटी के लिए हॉलमार्किंग की जाती है ताकि ग्राहकों के साथ किसी तरह की धोखाधड़ी न हो। भारत सरकार ने 16 जून 2021 से सोने के आभूषणों के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी। क्या है हॉलमार्क?(What Hallmarking in Gold and Silver)

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सोना-चांदी हॉलमार्किंग पर कितना लगता है चार्ज (तस्वीर-Canva)

Gold-Silver Hallmarking: सोने और चांदी के गहनों को उनकी सुंदरता और आंतरिक मूल्य के लिए लंबे समय से पसंद किया जाता रहा है। हालांकि बाजार में प्रचलित धोखाधड़ी की वजह से इन कीमती धातुओं की शुद्धता और प्रामाणिकता की पुष्टि करना महत्वपूर्ण है। हॉलमार्किंग स्कीम इस संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यहां आपको हॉलमार्किंग चार्ज और प्रक्रियाओं के बारे में जानने की आवश्यकता है।

सोने और चांदी की हॉलमार्किंग क्या है? Gold and Silver Hallmarking)

हॉलमार्किंग सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की आनुपातिक सामग्री को सटीक रूप से निर्धारित करने और आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया है। यह उनकी शुद्धता या सुंदरता की गारंटी देता है। ईटी के मुताबिक भारत में हॉलमार्किंग आईएस 15820 में उल्लिखित कड़े मानकों द्वारा शासित होती है।

सोना-चांदी हॉलमार्किंग चार्ज (Gold Silver Hallmark Charge)

हॉलमार्किंग शुल्क सोने-चांदी के सभी वस्तुओं पर लागू होता है चाहे उसका वजन कुछ भी हो। सोने की वस्तुओं के लिए चार्ज 45 रुपये प्रति वस्तु है, जबकि न्यूनतम चार्ज 200 रुपये प्रति कंसाइनमेंट है। इसी तरह चांदी की वस्तुओं के लिए चार्ज 35 रुपए प्रति वस्तु है, जबकि न्यूनतम चार्ज 150 रुपए प्रति कंसाइनमेंट है। अतिरिक्त टैक्स और लेवी भी लागू हो सकते हैं। प्रति कंसाइनमेंट में से एक नमूना निकाला जाता है और अनुपालन के लिए परीक्षण किया जाता है। एक कंसाइनमेंट के भीतर अलग-अलग लॉट मौजूद हो सकते हैं।

शुद्धता के लिए परीक्षण उपभोक्ता आईएस 1418 के अनुसार अग्नि परख मेथड के लिए 200 रुपए का परीक्षण शुल्क देकर ए एंड एच (परख और हॉलमार्किंग) केंद्र में शुद्धता के लिए अपने हॉलमार्क वाले आभूषणों का परीक्षण करा सकते हैं। इन केंद्रों को भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा मान्यता प्राप्त होना चाहिए और मान्यता प्राप्त ए एंड एच केंद्रों की एक लिस्ट हॉलमार्किंग सेक्शन के तहत बीआईएस वेबसाइट पर उपलब्ध है।

हॉलमार्किंग का महत्व (Importance of Gold - Silver Hallmarking)

हॉलमार्किंग का प्राथमिक उद्देश्य उपभोक्ताओं को नकली प्रोडक्ट से बचाना है। इस उद्देश्य से भारत सरकार ने 16 जून 2021 से सोने के आभूषणों के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी। 1 अप्रैल 2023 से ज्वैलर्स को छह अंकों की हॉलमार्क विशिष्ट पहचान (एचयूआईडी) संख्या के बिना किसी भी सोने के आभूषण बेचने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। पुराने हॉलमार्किंग चिह्न 30 जून 2021 को या उससे पहले खरीदे गए सोने के आभूषणों पर पुराने हॉलमार्किंग चिह्न हो सकते हैं, जिनमें शुद्धता या सुंदरता चिह्न, बीआईएस प्रतीक, जौहरी की पहचान संख्या और परख केंद्र का चिह्न या नंबर शामिल हैं।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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