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सोने का ये 'जुगाड़' लोन से भी है सस्ता, जानें क्या है Gold Overdraft?

सोने की बढ़ती कीमतों और बढ़ती मांग के बीच 'गोल्ड लोन' नकदी की जरूरत पूरा करने का एक बेहतरीन विकल्प बन गया है। बैंक अब ग्राहकों को दो तरह के विकल्प देते हैं गोल्ड लोन (ईएमआई आधारित) और गोल्ड ओवरड्राफ्ट। अपनी जरूरत के अनुसार सही विकल्प चुनकर आप गिरवी रखे सोने से आसानी से फंड प्राप्त कर सकते हैं।

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Gold Overdraft

अक्सर जब हमें अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो हम सबसे पहले 'गोल्ड लोन' के बारे में सोचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गोल्ड लोन से भी बेहतर और सस्ता एक और विकल्प मौजूद है, जिसे 'गोल्ड ओवरड्राफ्ट' (Gold Overdraft) कहा जाता है? यह सुविधा उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिन्हें बार-बार पैसों की जरूरत पड़ती है। गोल्ड ओवरड्राफ्ट आपके सोने को एक 'एटीएम' की तरह बदल देता है, जहां आप बैंक से तय सीमा तक पैसा निकाल सकते हैं और जब चाहें वापस जमा कर सकते हैं।

क्या है गोल्ड ओवरड्राफ्ट ?

गोल्ड लोन और गोल्ड ओवरड्राफ्ट में मुख्य अंतर ब्याज चुकाने के तरीके का है। एक सामान्य गोल्ड लोन में आपको पूरी रकम पर ब्याज देना पड़ता है, चाहे आप उसे इस्तेमाल करें या न करें। वहीं, गोल्ड ओवरड्राफ्ट में बैंक आपको आपके सोने की वैल्यू के हिसाब से एक क्रेडिट लिमिट दे देता है। सबसे अच्छी बात यह है कि आपको ब्याज केवल उसी राशि पर देना होता है, जिसे आप अपने खाते से 'विड्रॉ' (निकालते) करते हैं। अगर बैंक ने आपको 5 लाख की लिमिट दी है और आपने सिर्फ 1 लाख निकाला है, तो आपको पूरे 5 लाख पर नहीं, बल्कि केवल उस 1 लाख पर ही ब्याज देना होगा।

लोन के मुकाबले क्यों है ये ज्यादा फायदे का सौदा?

गोल्ड ओवरड्राफ्ट की सबसे बड़ी खूबी इसकी फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलापन) है। इसमें आपको कोई फिक्स्ड EMI भरने का झंझट नहीं होता। जैसे ही आपके पास पैसे आएं, आप उसे खाते में डालकर अपना कर्ज कम कर सकते हैं, जिससे ब्याज की लागत और कम हो जाती है। यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जिनका अपना बिजनेस है या जिन्हें महीने के बीच में बार-बार छोटे-मोटे खर्चों के लिए फंड चाहिए होता है। गोल्ड लोन में पैसा लेते ही ब्याज मीटर चालू हो जाता है, जबकि ओवरड्राफ्ट में आप अपनी सुविधा के मालिक खुद होते हैं।

कैसे मिलता है और क्या हैं शर्तें?

गोल्ड ओवरड्राफ्ट लेने की प्रक्रिया सामान्य गोल्ड लोन जैसी ही है। आपको अपना सोना बैंक में जमा करना होता है, बैंक उसकी शुद्धता और वजन के आधार पर वैल्यू तय करता है। इसके बाद, बैंक उस वैल्यू के एक निश्चित प्रतिशत के बराबर आपको ओवरड्राफ्ट लिमिट जारी कर देता है। इसके लिए बैंक आपसे KYC और आय का प्रमाण (कभी-कभी) मांग सकते हैं। एक बार लिमिट सेट हो जाने के बाद, आपको एक नेट बैंकिंग पोर्टल या चेकबुक दी जाती है, जिसके जरिए आप कहीं से भी पैसे निकाल सकते हैं।

किसे ध्यान रखनी चाहिए ये बातें?

गोल्ड ओवरड्राफ्ट बहुत आकर्षक लगता है, लेकिन इसमें कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। अगर आप लिमिट से ज्यादा पैसा निकाल लेते हैं या समय पर ब्याज का भुगतान नहीं करते, तो बैंक सोने की नीलामी कर सकता है। साथ ही, कुछ बैंक सामान्य गोल्ड लोन के मुकाबले ओवरड्राफ्ट पर ब्याज दरें थोड़ी ज्यादा रख सकते हैं, इसलिए आवेदन करने से पहले अलग-अलग बैंकों की तुलना जरूर करें।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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