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Circle Rates Revision: घर की रजिस्ट्री कराने जा रहे हैं? जानें सर्कल रेट बढ़ने पर आपको कितना देना होगा ज्यादा पैसा

सर्कल रेट में बदलाव आपकी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री को लाखों रुपये महंगा बना सकता है। अगर आप घर या जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो जानें कि सरकारी रेट बढ़ने से स्टाम्प ड्यूटी और आपके बजट पर कितना असर पड़ेगा।

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Jhalmudi Business (1)

अपना घर खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन इस सपने को पूरा करने की राह में केवल घर की कीमत ही नहीं, बल्कि रजिस्ट्री और स्टाम्प ड्यूटी का खर्च भी एक बड़ा हिस्सा होता है। हाल ही में कई राज्यों में 'सर्कल रेट' (Circle Rate) के रिवीजन की चर्चा तेज हो गई है। अगर आप भी कोई प्रॉपर्टी, प्लॉट या फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। सर्कल रेट में होने वाली मामूली सी बढ़ोतरी भी आपके रजिस्ट्री के बजट को लाखों रुपये तक बढ़ा सकती है।

आखिर क्या होता है सर्कल रेट?

आसान भाषा में समझें तो सर्कल रेट वह न्यूनतम सरकारी कीमत है, जिस पर किसी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री या बिक्री की जा सकती है। इसे प्रशासन (District Administration) द्वारा तय किया जाता है और यह अलग-अलग इलाकों, जैसे पॉश कॉलोनियों, कमर्शियल क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों के लिए अलग-अलग होता है। बाजार भाव (Market Rate) अक्सर सर्कल रेट से ज्यादा होता है, लेकिन सरकार को दिए जाने वाले टैक्स यानी स्टाम्प ड्यूटी की गणना हमेशा सर्कल रेट या सेल वैल्यू (जो भी ज्यादा हो) के आधार पर ही की जाती है।

रेट बढ़ने पर कैसे बढ़ता है खर्च?

मान लीजिए आप किसी इलाके में 50 लाख रुपये का एक फ्लैट खरीद रहे हैं जहां सर्कल रेट 5,000 रुपये प्रति वर्ग फुट है। अगर सरकार इस रेट को बढ़ाकर 5,500 रुपये कर देती है, तो आपकी प्रॉपर्टी की सरकारी वैल्यू खुद-ब-खुद बढ़ जाएगी। अब आपको बढ़ी हुई वैल्यू पर 5% से 7% तक की स्टाम्प ड्यूटी देनी होगी। इसका मतलब है कि रजिस्ट्री के समय आपको पहले के मुकाबले हजारों या लाखों रुपये ज्यादा चुकाने होंगे। इसके अलावा, सर्कल रेट बढ़ने का सीधा असर 'कैपिटल गेन टैक्स' पर भी पड़ता है, जो प्रॉपर्टी बेचने वाले को देना होता है।

रियल एस्टेट मार्केट पर इसका असर

सर्कल रेट बढ़ने से न केवल रजिस्ट्री महंगी होती है, बल्कि पूरे रियल एस्टेट मार्केट की कीमतें भी चढ़ जाती हैं। जब सरकारी रेट बढ़ता है, तो प्रॉपर्टी मालिक भी अपनी मांग (Asking Price) बढ़ा देते हैं। इससे मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हालांकि, सरकार का तर्क होता है कि सर्कल रेट को बाजार भाव के करीब लाने से काले धन (Black Money) के लेनदेन पर लगाम लगती है और सरकारी खजाने में राजस्व (Revenue) बढ़ता है, जिसका इस्तेमाल बुनियादी ढांचे के विकास में किया जाता है।

रजिस्ट्री से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप सर्कल रेट बढ़ने से पहले अपनी रजिस्ट्री कराना चाहते हैं, तो कुछ जरूरी तैयारी कर लें। सबसे पहले अपने इलाके के नए और पुराने सर्कल रेट की जानकारी तहसील कार्यालय या संबंधित सरकारी वेबसाइट से लें। यह भी जांचें कि क्या महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री कराने पर कोई छूट मिल रही है (कई राज्यों में महिलाओं के लिए स्टाम्प ड्यूटी 1% से 2% कम होती है)। यदि सर्कल रेट बढ़ने का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होने वाला है, तो कोशिश करें कि उससे पहले ही सेल डीड (Sale Deed) की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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