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कई साल से बैंक लॉकर की फीस नहीं चुकाई तो क्या होगा? कहीं हाथ से न निकल जाए कीमती सामान...बैंक उठा सकता है ये बड़ा कदम

अगर आप भी अपना सोना चांदी बैंक लॉकर में रखते हैं तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। फीस न चुकाने पर कहीं आपका कीमती सामान हाथ से न निकल जाए.

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कई साल से बैंक लॉकर की फीस नहीं चुकाई तो क्या होगा? कहीं हाथ से न निकल जाए कीमती सामान...बैंक उठा सकता है ये बड़ा कदम

सुरक्षा के लिहाज से बैंक लॉकर हम सभी की पहली पसंद होता है। हम अपने जीवन की सबसे कीमती चीजें, जैसे गहने, प्रॉपर्टी के कागज और जरूरी दस्तावेज, इसी भरोसे पर बैंक लॉकर में रखते हैं कि वे वहां सुरक्षित रहेंगे। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर आप अपने इस लॉकर का सालाना किराया (Rent) चुकाना भूल जाएं या कई सालों तक उसे ऑपरेट न करें, तो क्या होगा? रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियमों के अनुसार, बैंक लॉकर की फीस न चुकाना आपके लिए महंगा साबित हो सकता है और बैंक आपके लॉकर को लेकर सख्त कदम उठा सकता है। आइए जानते हैं लॉकर की फीस न भरने से क्या क्या नुकसान आपको हो सकते हैं।

फीस न चुकाने पर क्या करता है बैंक?

बैंक लॉकर का किराया आमतौर पर साल में एक बार लिया जाता है। अगर आप लगातार तीन सालों तक लॉकर का किराया नहीं चुकाते हैं, तो बैंक को यह अधिकार है कि वह आपके लॉकर को 'ब्रेक ओपन' (Break Open) कर दे, यानी उसे तोड़कर खोल दे। हालांकि, यह कार्रवाई इतनी जल्दी और अचानक नहीं होती। बैंक इसके लिए एक लंबी प्रक्रिया का पालन करता है। सबसे पहले बैंक आपको नोटिस भेजकर बकाया राशि चुकाने के लिए कहता है। अगर बार-बार नोटिस भेजने के बाद भी आप कोई जवाब नहीं देते या किराया नहीं भरते, तभी बैंक अगला कदम उठाता है।

लॉकर को खोलने (Break Open) का तरीका

जब बैंक लॉकर तोड़ने का फैसला करता है, तो उसे कुछ कानूनी नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। यह प्रक्रिया बैंक के अधिकारियों और स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में की जाती है। लॉकर के अंदर जो भी सामान निकलता है, उसकी एक विस्तृत लिस्ट (Inventory) तैयार की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा सकती है ताकि भविष्य में किसी भी विवाद से बचा जा सके। सामान को एक सीलबंद लिफाफे या पैकेट में सुरक्षित रख दिया जाता है और इसे तब तक बैंक के पास रखा जाता है जब तक कि लॉकर का मालिक अपना बकाया चुकाकर उसे वापस न मांग ले।

लॉकर ऑपरेट न करना भी है एक जोखिम

कई बार लोग किराया तो समय पर चुका देते हैं लेकिन सालों तक लॉकर खोलने नहीं जाते। आरबीआई के नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई लॉकर सात साल तक 'इनऑपरेटिव' रहता है (यानी सात साल तक उसे खोला नहीं गया), तो बैंक इसे जोखिम मान सकता है। भले ही किराया मिल रहा हो, बैंक आपको इसे ऑपरेट करने के लिए कह सकता है। अगर आप नोटिस के बावजूद इसे ऑपरेट नहीं करते, तो सुरक्षा कारणों से बैंक इसे भी ब्रेक ओपन कर सकता है।

रिफिलिंग और अन्य खर्चे

अगर बैंक को आपका लॉकर तोड़ना पड़ता है, तो इसका सारा खर्च (जैसे ताला बदलने का खर्चा और कानूनी प्रक्रिया की फीस) आपको ही देना होगा। इसके अलावा, आपके सामान को तब तक वापस नहीं किया जाएगा जब तक आप पिछले कई सालों का बकाया ब्याज सहित नहीं चुका देते।

बचाव के लिए क्या करें?

इस स्थिति से बचने का सबसे आसान तरीका यह है कि आप अपने बैंक खाते में 'ऑटो-डेबिट' (Auto-Debit) की सुविधा शुरू कर दें। इससे हर साल लॉकर का किराया अपने आप आपके खाते से कट जाएगा। इसके अलावा, समय-समय पर (कम से कम साल में एक बार) अपने लॉकर को ऑपरेट जरूर करें। बैंक में अपना मोबाइल नंबर और ईमेल अपडेट रखें ताकि आपको बैंक के नोटिस समय पर मिलते रहें। याद रखें, सावधानी ही आपके कीमती सामान की असली सुरक्षा है।

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Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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